29/11/2025
हिंदू धर्म छोड़ने के मुख्य कारण:
अंबेडकर ने हिंदू धर्म को इसलिए छोड़ा क्योंकि वे इसे जाति-प्रथा, असमानता और शोषण से भरा हुआ पाते थे, जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों के विरुद्ध था। उन्होंने यह निर्णय लिया कि एक ऐसा धर्म ही उनके और लाखों दलितों के लिए सम्मानजनक और समानतापूर्ण जीवन जीने का एकमात्र उपाय है, जिसमें ऐसे मूल्य हों। 14 अक्टूबर 1956 को, उन्होंने अपने लाखों अनुयायियों के साथ हिंदू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लिया।
जाति-प्रथा का भेदभाव: अंबेडकर ने बचपन से ही जाति-आधारित भेदभाव का अनुभव किया, जिसमें उन्हें सार्वजनिक प्याऊ से पानी पीने की अनुमति नहीं थी, नाई द्वारा बाल काटने से मना कर दिया गया था, और यहाँ तक कि स्कूल में भी उन्हें अलग बैठना पड़ता था।
समानता और स्वतंत्रता का अभाव: उनके अनुसार, हिंदू धर्म में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक मूल्यों का अभाव था, क्योंकि जाति-प्रथा ने इन सिद्धांतों को खत्म कर दिया था।
सामाजिक और कानूनी सुधारों की विफलता: उन्होंने हिंदू धर्म में मौजूद वर्ण व्यवस्था और छुआछूत को खत्म करने के लिए सामाजिक और कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन उन्हें लगा कि वे कभी भी पूरी तरह से सफल नहीं हो पाएंगे।
बौद्ध धर्म का आकर्षण: उन्होंने बौद्ध धर्म को चुना क्योंकि यह स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संदेश देता था, और जातिवाद की बजाय नैतिकता और वैज्ञानिकता पर आधारित था।
बौद्ध धर्म में विश्वास: उनका मानना था कि बौद्ध धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सभी लोगों को समान अधिकार और सम्मान देता है, और इसलिए उनके अनुयायियों के भविष्य को बदलने के लिए यह सबसे उपयुक्त था।