22/07/2026
जब किसान अपने हक़ के लिए आंदोलन कर रहे थे, तब झूठे नैरेटिव के सहारे उन्हें आतंकवादी तक कहा गया।
आज नौजवान अपने भविष्य और पारदर्शी भर्ती की मांग को लेकर सड़क पर हैं। उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने कई लोगों को दुखी किया। हमारे यहाँ तो जानवरों के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता।
आज वही किसान इन बच्चों के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि दर्द और संघर्ष की भाषा हर इंसान समझता है।
जय जवान, जय किसान। 🙏
लोकतंत्र में संवाद, न्याय और शांतिपूर्ण विरोध—तीनों का सम्मान होना चाहिए।