Pai Natural Farm

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Pai Natural Farm Pai Natural Farm (Natural Fruits & Vegetables Farm) is located at Village- Pai (Kaithal, Haryana)

*Respected all,**Pai Natural Farm wishing you a very very happy New Year 2025. May this year bring all the happiness & s...
01/01/2025

*Respected all,*

*Pai Natural Farm wishing you a very very happy New Year 2025. May this year bring all the happiness & success in your family. Celebrate this new year with our Natural products & Pure Multiflora honey.🎉🎉*

*With Kind regards*
*Sohan Dhull*
*+91-9871254174*

अपने फिर अपने Pai Natural Farm के आंवला के पौधे का पत्ता पिछली बार का रिकार्ड तोड़ते हुए। पिछली बार लगभग 2 फीट (22.5 इंच...
23/07/2024

अपने फिर अपने Pai Natural Farm के आंवला के पौधे का पत्ता पिछली बार का रिकार्ड तोड़ते हुए। पिछली बार लगभग 2 फीट (22.5 इंच) का साइज था पत्ते का लेकिन आज लगभग 3.5 फीट (40 इंच) साइज का पत्ता मिला। पेड़ पौधों को देशी खुराक मिलती रहेगी तो खेत में ऐसी ऐसी चीजें देखने को मिलेंगी जिनपर एक बार तो यकीन करना मुश्किल हो जाता है।

28/06/2024

फल और उनमे पाये जाने वाले विटामिन्स तथा खनिजों के नाम :-

विटामिन A - आम, पपीता, परसीमोन
विटामिन B1 (थाइमीन) - काजू, अखरोट, बादाम, अनन्नास
विटामिन B2 (राइबोफ्लेबिन) - बेल, पपीता, काजू, लीची
विटामिन C - चैरी, आंवला, अमरुद, नीबू, मीठा नारंगी, लेमन
कार्बोहाईड्रेट - अनन्नास, खजूर, करौंदा, केला, बेल, शरीफा, जामुन
प्रोटीन - काजू (21.2%), बादाम (20.8%), अखरोट (15.6 %)
वसा - अखरोट (64.5%), बादाम (58.9%), काजू (46.9%)
साइट्रिक अम्ल - बेरी, नीबू, अमरुद, नाशपाती
मैलिक अम्ल - सेव, केला, चैरी, बेर, तरबूज
टार्टरिक अम्ल - इमली, अंगूर

खनिज

कैल्शियम - लीची, करौंदा, अखरोट, बेल
आयरन - करौंदा, खजूर, अखरोट, सेव
फोस्फोरस - बादाम, काजू, अखरोट, लीची

समय के साथ पौधे लगाने में बदलाव।पुराने समय में लोग फलदार और छायादार वृक्ष और पौधे अपने आसपास, घर आंगन आदि में लगवाते थे ...
28/03/2024

समय के साथ पौधे लगाने में बदलाव।

पुराने समय में लोग फलदार और छायादार वृक्ष और पौधे अपने आसपास, घर आंगन आदि में लगवाते थे । आज कल लोग इतने आधुनिक हो गए हैं कि ऐसे पेड़ पौधे लगवाते हैं कि जो न फलदार होते हैं, न ही फूलदार होते हैं और न ही छायादार ।

आजकल लोग दुबई में या जो रेगिस्तान में खजूर, पाम और उसकी प्रजाति के पौधे हैं उसको बड़े शौक से लगवा रहे हैं जिसका न फल हो, न फूल हो न छाया हो ।

अरे दुबई एक ऐसा प्रदेश है जहाँ की जलवायु वनस्पतियों के अनुकूल नहीं है , वहाँ वही पौधे उगते हैं जो तेज धूप और बिना पानी के हो सकें । लेकिन चूंकि वह दुबई है, इसीलिए अगर कोई वहाँ थूक भी देगा तो लोग डिब्बो में सजा कर ले आयेंगे कि यह दुबई की थूक है ।

अरे पहले राजा महाराजा ऐसे पपेड़ लगवाते थे कि उनके राज्य में कोई भूखा प्यासा तक न सो पाये, कोई गर्मी से मर न पाए।
जहां तक मुझे याद है हमारे बुजुर्ग पैदल ही दूर दूर तक यात्राओं और दर्शनों के लिए निकलते थे । पास में केवल कुछ चना बोकली, एक लोटा और एक रस्सी होती थी । जहाँ कुवाँ देखा वहाँ रस्सी लगाकर लोटे से पानी खींच लिया और बाकी का जिस बगीचे के पास से गुजर रहे हैं तरह तरह फल और खाद्य सामग्री से पेट भर रहे हैं।

इसलिए कृप्या फलदार और छायादार वृक्ष या पौधे ही लगवायें। अगर आप चाहते हैं कि तमाम रंग बिरंगे पक्षी और तितलियों से आपका प्राँगण भरा रहे तो विदेशी Palm इत्यादि को श्रद्धांजलि दें। हमारे देश में 6 ऋतुएँ हैं , जहाँ हर प्रकार की वनस्पति हो सकती है। आप जैसा सौभाग्यशाली नागरिक होना दुर्लभ है मौसम और जलवायु के मामले में।

फलदार, छायादार, पुष्पदार पेड़ पौधों को तवज्जो दीजिये.

Swarnarekha Mango at full flowering at the age of 2 Years.
24/03/2024

Swarnarekha Mango at full flowering at the age of 2 Years.

Mallika Mango, Full flowering at 2 years plant. आजकल लोगों में धारणा है कि आम नहीं चलते, मेरा मानना है अगर आपका मिट्टी स...
24/03/2024

Mallika Mango, Full flowering at 2 years plant. आजकल लोगों में धारणा है कि आम नहीं चलते, मेरा मानना है अगर आपका मिट्टी सही है तो जरूर चलेंगे, 23 वैरायटी के आम हैं अपने Sonu Natural Fruits Farm - Pai पर। मिट्टी को सही कर लो सब चीजें हो जायेंगी।

विश्व गौरैया दिवस - 20 मार्च विश्व गौरैया दिवस मनाने का उद्देश्य गौरैया पक्षी की लुप्त होती प्रजाति को बचाना है। पेड़ों ...
20/03/2024

विश्व गौरैया दिवस - 20 मार्च

विश्व गौरैया दिवस मनाने का उद्देश्य गौरैया पक्षी की लुप्त होती प्रजाति को बचाना है। पेड़ों की अंधाधुंध होती कटाई, आधुनिक शहरीकरण और लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से गौरैया पक्षी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। एक वक्त था जब गौरैया की चीं-चीं की आवाज से ही लोगों की नींद खुला करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। यह एक ऐसी पक्षी है जो मनुष्य के इर्द-गिर्द रहना पसंद करती है। गौरैया पक्षी की संख्या में लगातार कमी एक चेतावनी है कि प्रदूषण और रेडिएशन प्रकृति और मानव के ऊपर क्या प्रभाव डाल रहा है। तो इस ओर काम करने की जरूरत है।

Sonu Natural Fruits Farm
Pai (Kaithal) Haryana

2nd year Canopy Management at Sonu Natural Fruits Farm, Pai (Kaithal)
20/03/2024

2nd year Canopy Management at Sonu Natural Fruits Farm, Pai (Kaithal)

पौधों में पोषक तत्वों का काम और उसकी कमी के लक्षण1- नत्रजन (नाइट्रोजन) के प्रमुख कार्य नाइट्रोजन से प्रोटीन बनती है जो ज...
08/03/2024

पौधों में पोषक तत्वों का काम और उसकी कमी के लक्षण

1- नत्रजन (नाइट्रोजन) के प्रमुख कार्य
नाइट्रोजन से प्रोटीन बनती है जो जीव द्रव्य का अभिन्न अंग है तथा पर्ण हरित के निर्माण में भी भाग लेती है। यह पौधों को गहरा हरा रंग प्रदान करता है। वानस्पतिक वृद्धि को बढ़ावा मिलता है। अनाज तथा चारे वाली फसलों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है। यह दानो के बनने में मदद करता है।
नत्रजन-कमी के लक्षण
पौधों मे प्रोटीन की कमी होना व हल्के रंग का दिखाई पड़ना। निचली पत्तियाँ झड़ने लगती है, जिसे क्लोरोसिस कहते हैं। पौधे की बढ़वार का रूकना, कल्ले कम बनना, फूलों का कम आना। फल वाले वृक्षों का गिरना। पौधों का बौना दिखाई पड़ना। फसल का जल्दी पक जाना।
2- फॉस्फोरस के कार्य
फॉस्फोरस की उपस्थिति में कोशा विभाजन जल्द होता है। यह न्यूक्लिक अम्ल, फास्फोलिपिड्स व फाइटीन के निर्माण में सहायक है। प्रकाश संश्लेषण में सहायक है। यह कोशिका झिल्ली, क्लोरोप्लास्ट तथा माइटोकान्ड्रिया का मुख्य अवयव है। फास्फोरस मिलने से पौधों में बीज स्वस्थ पैदा होता है तथा बीजों का भार बढ़ना, पौधों में रोग व कीटरोधकता बढ़ती है। फास्फोरस के प्रयोग से जड़ें तेजी से विकसित तथा मजबूत होती हैं। पौधों में खड़े रहने की क्षमता बढ़ती है। इससे फल जल्दी आते हैं, फल जल्दीबनते है व दाने जल्दी पकते हैं। यह नत्रजन के उपयोग में सहायक है तथा फलीदार पौधों में इसकी उपस्थिति से जड़ों की ग्रंथियों का विकास अच्छा होता है।
फॉस्फोरस-कमी के लक्षण
पौधे छोटे रह जाते हैं, पत्तियों का रंग हल्का बैगनी या भूरा हो जाता है। फास्फोरस गतिशील होने के कारण पहले ये लक्षण पुरानी (निचली) पत्तियों पर दिखते हैं। दाल वाली फसलों में पत्तियां नीले हरे रंग की हो जाती हैं। पौधो की जड़ों की वृद्धि व विकास बहुत कम होता है कभी-कभी जड़े सूख भी जाती हैं। अधिक कमी में तने का गहरा पीला पड़ना, फल व बीज का निर्माण सही न होना। इसकी कमी से आलू की पत्तियां प्याले के आकार की, दलहनी फसलों की पत्तियाँ नीले रंग की तथा चौड़ी पत्ती वाले पौधे में पत्तियों का आकार छोटा रह जाता है।
3- पोटैशियम के कार्य
जड़ों को मजबूत बनाता है एवं सूखने से बचाता है। फसल में कीट व रोग प्रतिरोधकता बढ़ाता है। पौधे को गिरने से बचाता है। स्टार्च व शक्कर के संचरण में मदद करता है। पौधों में प्रोटीन के निर्माण में सहायक है। अनाज के दानों में चमक पैदा करता है। फसलो की गुणवत्ता में वृद्धि करता है। आलू व अन्य सब्जियों के स्वाद में वृद्धि करता है। सब्जियों के पकने के गुण को सुधारता है। मृदा में नत्रजन के कुप्रभाव को दूर करता है।
पोटैशियम-कमी के लक्षण
पत्तियाँ भूरी व धब्बेदार हो जाती हैं तथा समय से पहले गिर जाती हैं। पत्तियों के किनारे व सिरे झुलसे दिखाई पड़ते हैं। इसी कमी से मक्का के भुट्टे छोटे, नुकीले तथा किनारोंपर दाने कम पड़ते हैं। आलू में कन्द छोटे तथा जड़ों का विकास कम हो जाता है पौधों में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया कम तथा श्वसन की क्रिया अधिक होती है।
4- कैल्सियम के कार्य
यह गुणसूत्र का संरचनात्मक अवयव है। दलहनी फसलों में प्रोटीन निर्माण के लिए आवश्यक है। यह तत्व तम्बाकू, आलू व मूँगफली के लिए अधिक लाभकारी है। यह पौधों में कार्बोहाइड्रेट संचालन में सहायक है।
कैल्सियम-कमी के लक्षण
नई पत्तियों के किनारों का मुड़ व सिकुड़ जाना। अग्रिम कलिका का सूख जाना। जड़ों का विकास कम तथा जड़ों पर ग्रन्थियों की संख्या में काफी कमी होना। फल व कलियों का अपरिपक्व दशा में मुरझाना।
5- मैग्नीशियम के कार्य
क्रोमोसोम, पोलीराइबोसोम तथा क्लोरोफिल का अनिवार्य अंग है। पौधों के अन्दर कार्बोहाइड्रेट संचालन में सहायक है। पौधों में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा के निर्माण मे सहायक है। चारे की फसलों के लिए महत्वपूर्ण है।
मैग्नीशियम-कमी के लक्षण
पत्तियां आकार में छोटी तथा ऊपर की ओर मुड़ी हुई दिखाई पड़ती हैं। दलहनी फसलों में पत्तियो की मुख्य नसों के बीच की जगह का पीला पड़ना।
6 गन्धक (सल्फर) के कार्य
यह अमीनो अम्ल, प्रोटीन (सिसटीन व मैथिओनिन), वसा, तेल एव विटामिन्स के निर्माण में सहायक है। विटामिन्स (थाइमीन व बायोटिन), ग्लूटेथियान एवं एन्जाइम 3A22 के निर्माण में भी सहायक है। तिलहनी फसलों में तेल की प्रतिशत मात्रा बढ़ाता है। यह सरसों, प्याज व लहसुन की फसल के लिये जरूरी है। तम्बाकू की पैदावार 15-30 प्रतिशत तक बढ़ती है।
गन्धक-कमी के लक्षण
नई पत्तियों का पीला पड़ना व बाद में सफेद होना तने छोटे एवं पीले पड़ना। मक्का, कपास, तोरिया, टमाटर व रिजका में तनों का लाल हो जाना। ब्रेसिका जाति (सरसों) की पत्तियों का प्यालेनुमा हो जाना।
7- लोहा (आयरन) के कार्य
लोहा साइटोक्रोम्स, फैरीडोक्सीन व हीमोग्लोबिन का मुख्य अवयव है। क्लोरोफिल एवं प्रोटीन निर्माण में सहायक है। यह पौधों की कोशिकाओं में विभिन्न ऑक्सीकरण-अवकरण क्रियाओं मे उत्प्रेरक का कार्य करता है। श्वसन क्रिया में आक्सीजन का वाहक है।
लोहा-कमी के लक्षण
पत्तियों के किनारों व नसों का अधिक समय तक हरा बना रहना। नई कलिकाओं की मृत्यु को जाना तथा तनों का छोटा रह जाना। धान में कमी से क्लोरोफिल रहित पौधा होना, पैधे की वृद्धि का रूकना।
8- जस्ता (जिंक) के कार्य
कैरोटीन व प्रोटीन संश्लेषण में सहायक है। हार्मोन्स के जैविक संश्लेषण में सहायक है। यह एन्जाइम (जैसे-सिस्टीन, लेसीथिनेज, इनोलेज, डाइसल्फाइडेज आदि) की क्रियाशीलता बढ़ाने में सहायक है। क्लोरोफिल निर्माण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
जस्ता-कमी के लक्षण
पत्तियों का आकार छोटा, मुड़ी हुई, नसों मे निक्रोसिस व नसों के बीच पीली धारियों का दिखाई पड़ना। गेहूं में ऊपरी 3-4 पत्तियों का पीला पड़ना। फलों का आकार छोटा व बीज की पैदावार का कम होना। मक्का एवं ज्वार के पौधों में बिलकुल ऊपरी पत्तियाँ सफेद हो जाती हैं। धान में जिंक की कमी से खैरा रोग हो जाता है। लाल, भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं।
9- ताँबा (कॉपर) के कार्य
यह इंडोल एसीटिक अम्ल वृद्धिकारक हार्मोन के संश्लेषण में सहायक है। ऑक्सीकरण-अवकरण क्रिया को नियमितता प्रदान करता है। अनेक एन्जाइमों की क्रियाशीलता बढ़ाता है। कवक रोगो के नियंत्रण में सहायक है।
ताँबा-कमी के लक्षण
फलों के अंदर रस का निर्माण कम होना। नीबू जाति के फलों में लाल-भूरे धब्बे अनियमित आकार के दिखाई देते हैं। अधिक कमी के कारण अनाज एवं दाल वाली फसलों में रिक्लेमेशन नामक बीमारी होना।
10- बोरान के कार्य
पौधों में शर्करा के संचालन मे सहायक है। परागण एवं प्रजनन क्रियाओ में सहायक है। दलहनी फसलों की जड़ ग्रन्थियों के विकास में सहायक है। यह पौधों में कैल्शियम एवं पोटैशियम के अनुपात को नियंत्रित करता है। यह डीएनए, आरएनए, एटीपी पेक्टिन व प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक है
बोरान-कमी के लक्षण
पौधे की ऊपरी बढ़वार का रूकना, इन्टरनोड की लम्बाई का कम होना। पौधों मे बौनापन होना। जड़ का विकास रूकना। बोरान की कमी से चुकन्दर में हर्टराट, फूल गोभी मे ब्राउनिंग या खोखला तना एवं तम्बाखू में टाप-सिकनेस नामक बीमारी का लगना।
11- मैंगनीज के कार्य
क्लोरोफिल, कार्बोहाइड्रेट व मैंगनीज नाइट्रेट के स्वागीकरण में सहायक है। पौधों में ऑक्सीकरण-अवकरण क्रियाओं में उत्प्रेरक का कार्य करता है। प्रकाश संश्लेषण में सहायक है।
मैंगनीज-कमी के लक्षण
पौधों की पत्तियों पर मृत उतको के धब्बे दिखाई पड़ते हैं। अनाज की फसलों में पत्तियाँ भूरे रंग की व पारदर्शी होती है तथा बाद मे उसमे ऊतक गलन रोग पैदा होता है। जई में भूरी चित्ती रोग, गन्ने का अगमारी रोग तथा मटर का पैंक चित्ती रोग उत्पन्न होते हैं।
12- क्लोरीन के कार्य
यह पर्णहरिम के निर्माण में सहायक है। पोधो में रसाकर्षण दाब को बढ़ाता है। पौधों की पंक्तियों में पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाता है।
क्लोरीन-कमी के लक्षण
गमलों में क्लोरीन की कमी से पत्तियों में विल्ट के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कुछ पौधों की पत्तियों में ब्रोन्जिंग तथा नेक्रोसिस रचनायें पाई जाती हैं। पत्ता गोभी के पत्ते मुड़ जाते हैं तथा बरसीम की पत्तियाँ मोटी व छोटी दिखाई पड़ती हैं।
13- मालिब्डेनम के कार्य
यह पौधों में एन्जाइम नाइट्रेट रिडक्टेज एवंनाइट्रोजिनेज का मुख्य भाग है। यह दलहनी फसलों में नत्रजन स्थिरीकरण, नाइट्रेट एसीमिलेशन व कार्बोहाइड्रेट मेटाबालिज्म क्रियाओ में सहायक है। पौधों में विटामिन-सी व शर्करा के संश्लेषण में सहायक है।
मालिब्डेनम-कमी के लक्षण
सरसों जाति के पौधो व दलहनी फसलों में मालिब्डेनम की कमी के लक्षण जल्दी दिखाई देते हैं। पत्तियों का रंग पीला हरा या पीला हो जाता है तथा इसपर नारंगी रंग का चितकबरापन दिखाई पड़ता है। टमाटर की निचली पत्तियों के किनारे मुड़ जाते हैं तथा बाद में मोल्टिंग व नेक्रोसिस रचनायें बन जाती हैं। इसकी कमी से फूल गोभी में व्हिपटेल एवं मूली मे प्याले की तरह रचनायें बन जाती हैं। नीबू जाति के पौधो में मॉलिब्डेनम की कमी से पत्तियों मे पीला धब्बा रोग लगता है।

अपने प्राकृतिक बाग (Sonu Natural Fruits Farm) का VNR वैरायटी का अमरूद जिसका वजन 450 ग्राम के करीब पाया गया. Sonu Natural...
07/03/2024

अपने प्राकृतिक बाग (Sonu Natural Fruits Farm) का VNR वैरायटी का अमरूद जिसका वजन 450 ग्राम के करीब पाया गया.
Sonu Natural Fruits Farm
Near Satsang Bhawan
Village - Pai (Kaithal)

*लीवर को ठीक रखने के चमत्कारी उपाय* ----- ***********************लीवर का ख़राब होना हमारे स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित...
04/03/2024

*लीवर को ठीक रखने के चमत्कारी उपाय* -----
***********************
लीवर का ख़राब होना हमारे स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। एक तो खाना नहीं पचेगा, इससे भोजन के तत्व रस, रक्त में परिवर्तित नहीं हो पाएंगे, स्वास्थ्य लगातार गिरता जाएगा, अनमनापन बना रहेगा। किसी काम में मन नहीं लगेगा। ज़्यादा दिनों तक यदि यह स्थिति रही तो अचलस्‍त भी हो जाएंगे। इसके अलावा *पीलिया*, *हेपेटाइटिस बी, सी* आदि भयानक रोग जन्म ले सकते हैं। इसलिए हमेशा लीवर को ठीक रखने का उपाय करना चाहिए। लीवर भोजन पचाने के अलावा ऊर्जा को संरक्षित करता है, विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है, प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करने के साथ ही अनेक आवश्यक रसायनों का उत्पादन करता है।

*लीवर ख़राब होने के कारण*
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भोजन में ज़्यादा तेल, घी का प्रयोग, शराब का सेवन आदि इसके मूल कारण हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि यदि आप शराब का सेवन नहीं करते तो आपका लीवर ख़राब नहीं हो सकता। अनियमित व दूषित खान-पान के अलावा भी कई कारण हो सकते हैं।

*लीवर ख़राब होने के लक्षण*....
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लीवर ख़राब होने से मुंह में अमोनिया ज़्यादा रिसता है, जिससे मुंह से बदबू आती है। त्वचा क्षतिग्रस्‍त होने लगती है, ख़ासकर आंखों के नीचे की त्‍वचा सबसे पहले प्रभावित होती है। त्‍वचा पर थकान साफ़ नज़र आने लगती है। त्‍वचा का रंग उड़ जाता है और कभी-कभी सफेद धब्‍बे दिखाई पड़ते हैं, इन्‍हें लीवर स्‍पॉट कहा जाता है।
कभी-कभी जब लीवर पर वसा जम जाता है तो पानी भी नहीं पचता है।
मल-मूत्र में हमेशा हरापन लीवर ख़राब होने का संकेत है। यदि यह कभी-कभार हो तो स‍मझिए लीवर ख़राब नहीं है बल्कि पानी की कमी से ऐसा हुआ है।
यदि पीलिया रोग हो गया है तो इसका मतलब कि लीवर में गड़बड़ी आ गई है।
लीवर से स्रवित होने वाला एंजाइम *बाइल* का स्‍वाद कड़वा होता है, जब मुंह में कड़वापन आने लगे तो समझ लेना चाहिए कि लीवर में कुछ गड़बड़ी आ गई है और बाइल मुंह तक आ रहा है।
पेट में सूजन आने का मतलब लीवर बड़ा हो गया है।

*लीवर को ठीक करने की घरेलू औषधियां*...
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रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्‍दी मिलाकर पी जाएं। हल्‍दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, यह एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है। यह हेपेटाइटिस बी, सी के वायरस को भी बढ़ने रोकती है।

भोजन से पहले एक गिलास पानी में *एक चम्‍मच सेब का सिरका* व *एक चम्मच मधु* मिलाकर सेवन करने से लीवर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह शरीर की चर्बी भी घटाता है।

लीवर को स्वस्थ रखने के लिए *प्रतिदिन चार-पांच कच्‍चा आंवला* खाना चाहिए। इसमें भरपूर विटामिन सी मिलता है जो लीवर के सुचारु संचलन में मदद करता है।

*लीवर सिरोसिस के लिए पपीता* रामबाण इलाज है। प्रतिदिन दो चम्‍मच पपीता के रस में आधा चम्‍मच नींबू का रस मिलाकर पीने से लीवर सिरोसिस ठीक हो जाता है। लीवर की रक्षा के लिए तीन-चार सप्‍ताह तक नियमित इसका सेवन करना चाहिए।

*सिंहपर्णी जड़* की चाय दिन में दो बार पीना चाहिए। इसे पानी में उबालकर भी पिया जा सकता है। बाज़ार में सिंहपर्णी का पाउडर भी मिलता है।

पानी उबाल लें और उसमें मुलेठी की जड़ का पाउडर डाल दें। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसे छानकर कर रख लें। और दिन में दो बार सेवन करें। इसे चाय के बराबर लेना चाहिए। इससे ख़राब लीवर को ठीक किया जा सकता है।

अलसी के बीज को पीसकर सलाद के साथ खाने से लीवर की बीमारियां नहीं होतीं। अलसी में *फीटकोंस्टीटूएंट्स* होता है जो हार्मोंन को रक्त में घूमने से रोकता है और लीवर का तनाव कम करता है।

*एवोकैडो और अखरोट* में ग्लुटथायन मिलता है जो लीवर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।

लीवर सिरोसिस के लिए पालक व गाजर के रस का मिश्रण उत्तम इलाज है। दोनों की मात्रा समान होनी चाहिए। दिन में कम से कम एक बार इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

पत्तेदार सब्ज़ियों व सेब में पेक्टिन पाया जाता है जो पाचन तंत्र के विषैले तत्वों को बाहर निकालकर लीवर को ठीक रखता है।

*भूमि आंवला* लीवर की तमाम समस्‍याओं को दूर करता है। इसे उखाड़ कर जड़ सहित पीस लें और पी जाएं। लीवर का सूजन, लीवर का बढ़ना व पीलिया आदि रोगों में यह अत्यंत लाभकारी है।

29/02/2024

Be aware of Video scams from fraud Facebook I'ds. Some fake female accounts are created by scammers and send you friend requests. When you accept them they started to contact you through n**e video calls on Facebook messenger, and then they record that calls and ask you for Money and give the warnings to viral that video call recording. They mixes n**e content in that videos also so that you become the part of their scam. So be aware all of you. Just Report these profiles to Facebook. & also if you receive calls then report to online fraud and crime branch at your nearest. I also received the same yesterday from a I'd named Pooja Sharma which was created by a person named Amit Singh.

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Rajaund Road Pai, Near Satsang Bhawan
Pai
136043

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