11/04/2024
ज़ब एक गलतफ़हमी क़े कारण हजारों छत्रयनियों को जौहर करना पड़ा,,,,
शेरनी एक बार में एक ही शेर को जन्म देती है सज्जन लोग बात को एक बार ही कहता है, केला एक बार ही फलता हैं स्त्री को एक बार ही तेल उबटन लगाया जाता हैं ऐसा ही राव हम्मीर का हठ हैं यानि हम्मीर देव चौहान ने एक बार जो ठान लिया, फिर वो अपनी भी नहीं सुनते थे, इस कारण इन्हें हठीला हम्मीर भी कहा जाता हैं.
अलाउद्दीन खिलजी को बार बार पराजित कर अपनी जेल में तीन माह रखने वाले हम्मीर की वीरता और निर्णय लेने की कला में माहिर थे.
हम्मीर देव चौहान का शाका करना
अलाउद्दीन खिलजी के साथ लड़े अंतिम युद्ध क़े अंतिम चरण में जब राजपूत यौद्धा केसरिया कर तलवारे लेकर दुर्ग से बाहर निकले तो उनकी लहराती तलवारों से खौप खाकर खिलजी के सैनिक भाग खड़े हुए.
खिलजी की 20 करोड़ की पैदल भागती सेना अपने ध्वज युद्धभूमि में ही छोड़ गई थी,
ऐसा कहा जाता हैं कि जब पूरी खिलजी की सेना युद्ध भूमि से भाग गई तो राजपूत सैनिक अपनी भगवा पताकाओं के साथ खिलजी के काले ध्वज भी लेकर दुर्ग में पहुच रहे थे,,
उन काले झंडो को देखकर महल की रानियों को लगा कि उनकी हार हो गई तथा काले झंडो के साथ खिलजी दुर्ग की ओर बढ़ रहा हैं,,
यह संदेश पाकर सभी स्त्रियाँ जौहर कर लेती हैं. किले में प्रवेश पर हम्मीर देव चौहान को अपनी भूल पर बड़ा पश्चाताप होने लगा.,,
अपनी आँखों से जलती देख किले की महिलाओं को उनका दिल ग्लानि से भर गया. उन्होंने इस दुर्घटना का जिम्मेदार स्वयं को माना और प्रायश्चित करने के उद्देश्य से अपना सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ा दिया था.
बताया जाता है कि जब इस घटना का पता अलाउद्दीन खिलजी को चलता है तो वह शत्रु विहीन हो चुके रणथम्भौर के दुर्ग पर अपना आधिपत्य जमा लेता हैं.
राजपुताना विरासत