30/01/2026
पाल समाज (गडरिया/पाल/बघेल) का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। प्राचीन और मध्यकालीन भारत में इस समाज से जुड़े कई प्रभावशाली शासकों और राजवंशों का उल्लेख मिलता है।
इतिहासकारों और सामाजिक मान्यताओं के अनुसार, पाल समाज के प्रमुख राजाओं और राजवंशों का विवरण नीचे दिया गया है:
1. पाल राजवंश (बंगाल और बिहार)
यह भारत के सबसे शक्तिशाली राजवंशों में से एक था। हालांकि इसके मूल को लेकर अलग-अलग मत हैं, लेकिन पाल समाज के लोग इन्हें अपना पूर्वज मानते हैं।
राजा गोपाल: पाल वंश के संस्थापक।
राजा धर्मपाल: इन्होंने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
राजा देवपाल: इनके समय साम्राज्य का विस्तार काफी अधिक हुआ।
2. इंदौर का होल्कर राजवंश
पाल (धनगर/गडरिया) समाज के गौरव का सबसे बड़ा प्रतीक अहिल्याबाई होल्कर का शासन है।
मल्हारराव होल्कर: इंदौर राज्य के संस्थापक और मराठा साम्राज्य के महान सेनापति।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर: एक न्यायप्रिय शासिका जिन्होंने देशभर में मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का निर्माण कराया।
3. अन्य प्रमुख शासक और रियासतें
हर्यंक वंश (मगध): कुछ इतिहासकारों के अनुसार अजातशत्रु और बिम्बिसार का संबंध भी इसी मूल से था।
भर राजा: उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पाल-बघेल समाज के राजाओं का शासन रहा है, जिन्हें 'भर' राजा भी कहा जाता था (जैसे सुहेलदेव राजभर के वंशज)।
कुरुक्षेत्र और पंजाब के क्षेत्र: मध्यकाल में छोटे-छोटे कई पाल राजाओं का शासन इन क्षेत्रों में रहा।
ध्यान देने योग्य बात
इतिहास में "पाल" शब्द का अर्थ 'पालक' या 'रक्षक' भी होता है, इसलिए कई राजवंशों ने इस उपाधि का उपयोग किया। वर्तमान में पाल समाज मुख्य रूप से राजा मल्हारराव होल्कर और माता अहिल्याबाई को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानता है।