03/05/2025
भारत के उत्तर क्षेत्र में खरपतवारनाशक (Herbicides)
1. खरपतवारनाशक क्या हैं? 🌱
खरपतवारनाशक (Herbicides) वे रसायन हैं, जो फसलों में अवांछित पौधों (खरपतवार) को नियंत्रित या नष्ट करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। इनका सही चयन एवं प्रयोग किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने और खरपतवारों से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है।
2. खरपतवारनाशकों की श्रेणियाँ
A. चयनात्मक (Selective) और गैर-चयनात्मक (Non-Selective)
चयनात्मक (Selective)
सिर्फ़ विशेष प्रकार के खरपतवारों को नियंत्रित करते हैं।
उदाहरण:
2,4-D (चौड़ी पत्ती खरपतवार के लिए)
मेटसलफ़्यूरॉन-मेथाइल (गेहूँ में चौड़ी पत्ती खरपतवार)
फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथाइल, क्लोडिनफॉप (गेहूँ में घास कुल के खरपतवार)
बेंटाज़ोन (दलहनी फसलों और सब्जियों में चौड़ी पत्ती खरपतवार)
उपयोग: गेहूँ, धान, मक्का, सब्जियाँ आदि फसलों में जहाँ सिर्फ़ खरपतवार को नियंत्रित करना होता है, फसल को नहीं।
गैर-चयनात्मक (Non-Selective)
सभी प्रकार के पौधों को प्रभावित करते हैं, चाहे वो खरपतवार हों या मुख्य फसल।
उदाहरण:
ग्लाइफोसेट
पैराquat
ग्लूफोसेनेट-अमोनियम
डीक्वाट
उपयोग:
ज़ीरो टिलेज या कंज़र्वेशन टिलेज में
फसल बोने से पहले या कटाई के बाद
नॉन-क्रॉप एरिया (खाली खेत की सफ़ाई)
B. सम्पर्क (Contact) और प्रणालीगत (Systemic)
सम्पर्क (Contact)
सिर्फ़ पत्ती या तने के संपर्क में आने वाली जगह को ही नष्ट करते हैं।
जड़ों तक नहीं पहुँचते।
उदाहरण:
पैराquat
डीक्वाट
उपयोग:
खरपतवार के त्वरित नियंत्रण के लिए
जहाँ गहरी जड़ों वाले खरपतवार न हों
प्रणालीगत (Systemic)
पौधे द्वारा अवशोषित होकर जड़ों और अन्य हिस्सों तक पहुँचते हैं, जिससे खरपतवार आंतरिक रूप से नष्ट होता है।
उदाहरण:
ग्लाइफोसेट
2,4-D
एट्राज़ीन (कुछ हद तक)
इमज़ापायर, ट्रायक्लोपीर, आदि
उपयोग:
गहरे जड़वाले खरपतवारों को पूरी तरह ख़त्म करना
दीर्घकालीन नियंत्रण
C. पूर्व अंकुरण (Pre-emergence) और पश्च-अंकुरण (Post-emergence)
पूर्व अंकुरण (Pre-emergence)
खरपतवार के बीज अंकुरित होने से पहले मिट्टी में दिया जाता है।
उदाहरण:
पेंडीमेथालिन
एट्राज़ीन
अलाक्लोर, मेटोलाक्लोर
उपयोग: धान, मक्का, गन्ना, सोयाबीन, मूँगफली आदि में खरपतवार उगने से पहले रोकथाम।
पश्च-अंकुरण (Post-emergence)
खरपतवार उग आने के बाद स्प्रे किया जाता है।
उदाहरण:
2,4-D, इज़ोप्रोट्यूरॉन (गेहूँ)
मेटसलफ़्यूरॉन-मेथाइल, अमीनी सल्फ्यूरॉन
बिसपायरिबैक सोडियम, पेनोक्ससुलैम (धान)
उपयोग: जब खरपतवार दिखाई देने लगें (2-4 पत्तों की अवस्था) तब तुरंत छिड़काव करें।
D. अवशेषीय (Residual) खरपतवारनाशक
ये मिट्टी में रहकर खरपतवार के नए बीजों को अंकुरित होने से रोकते हैं।
उदाहरण:
एट्राज़ीन (मक्का)
एलाक्लोर, मेटोलाक्लोर (सोयाबीन, मूँगफली, सब्जियाँ)
पेंडीमेथालिन (धान, सब्जियाँ)
उपयोग:
लंबी अवधि तक प्रभावी
बीज के अंकुरण को रोककर खरपतवार प्रकोप कम करना
3. उत्तर भारत में प्रमुख उदाहरण 🌾
गेहूँ (Wheat)
पश्च-अंकुरण:
2,4-D, मेटसलफ़्यूरॉन-मेथाइल (चौड़ी पत्ती खरपतवार)
फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथाइल, क्लोडिनफॉप, पिनोक्साडेन (घास कुल के खरपतवार)
संयोजन: कुछ मामलों में 2,4-D + फेनॉक्साप्रॉप, क्लोडिनफॉप + मेटसलफ्रान का प्रयोग।
धान (Paddy)
पूर्व अंकुरण:
ब्यूटाक्लोर, पेंडीमेथालिन
प्रिटिलाक्लोर
पश्च-अंकुरण:
बिसपायरिबैक सोडियम, पेनोक्ससुलैम, एज़ीमसल्फ्यूरॉन
क्विंकलोरैक, साइक्लोक्सीडिम (यदि घास कुल के खरपतवार अधिक हों)
मक्का (Maize)
पूर्व अंकुरण:
एट्राज़ीन, सिमेज़ीन
पश्च-अंकुरण:
2,4-D अमाइन, डिकाम्बा, टेम्बोट्रियोन
टॉपरेमेज़ोन, हैलॉक्सिफॉप (घास कुल के लिए)
गन्ना (Sugarcane)
पूर्व अंकुरण:
पेंडीमेथालिन, एट्राज़ीन
अलाक्लोर, डाययूरॉन
संभव जोड़: मेट्रीब्यूज़िन, एस-метोलाक्लोर
सब्जियाँ (Vegetables)
चयनात्मक:
मेटोलाक्लोर, बेंटाज़ोन, पेंडिमेथालिन
ऑक्सीफ्लोरफेन (हरी सब्जियों में)
सम्पर्क:
पैराquat, ग्लूफोसेनेट-अमोनियम (खाली खेत या बुवाई से पहले)
दलहनी फसलें (Pulses)
पूर्व अंकुरण:
पेंडीमेथालिन, अलाक्लोर
पश्च-अंकुरण:
इमैज़ेथापYR, क्विज़ालोफॉप (घास कुल के खरपतवार)
4. सर्वोत्तम परिणाम के लिए टिप्स ✅
4.1 सही समय का चयन ⏰
पूर्व अंकुरण: फसल बोने के तुरंत बाद या 1-2 दिन के भीतर।
पश्च-अंकुरण: खरपतवार के 2-4 पत्ते आने पर, जब वो सक्रिय रूप से बढ़ रहे हों।
4.2 सही मात्रा (डोज) ⚖️
हमेशा लेबल पर दी गई अनुशंसित मात्रा का पालन करें।
कम डोज → खरपतवार पूरी तरह नष्ट नहीं होंगे।
अधिक डोज → फसल को नुकसान + अतिरिक्त खर्च।
4.3 मिश्रण क्रम (WALES मेथड) 🌀
W (Water) – टैंक में साफ पानी भरें।
A (Agitate) – घोल को हिलाएं।
L (Dry formulations like WP/WDG) – वेटटेबल पाउडर/दानेदार मिलाएँ।
E (Liquid formulations like SL/SC/EC) – तरल या इमल्सिफ़ायबल कंसंट्रेट मिलाएँ।
S (Surfactant/Adjuvant) – सर्फ़ेक्टेंट/एडजुवेंट/ऑइल अंत में डालें।
4.4 जाँच (Jar Test) 🧪
सभी उत्पादों को मिलाने से पहले किसी छोटे जार में टेस्ट करें।
जमावट, परत बनने या रासायनिक प्रतिक्रिया दिखने पर मिश्रण न करें।
4.5 पानी की गुणवत्ता 🚰
पीएच 5.5-6.5 के बीच रखें।
गंदा या अत्यधिक खारा पानी खरपतवारनाशक की क्षमता कम कर सकता है।
4.6 मौसम पर ध्यान ☀️🌧️
तेज धूप या बारिश से ठीक पहले छिड़काव न करें।
10-12 किमी/घं से अधिक हवा होने पर स्प्रे न करें (ड्रिफ्ट का ख़तरा)।
4.7 सुरक्षा उपाय 🛡️
दस्ताने, मास्क, चश्मा पहनें।
स्प्रे के बाद साबुन से हाथ धोएँ।
खाली पैकेट या बोतलों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करें।
4.8 फसल चक्र ♻️
एक ही रसायन का बार-बार उपयोग करने से खरपतवार में प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) विकसित हो सकता है।
बदल-बदलकर खरपतवारनाशक का उपयोग करें।
5. खरपतवारनाशक की क्षमता बढ़ाने के उपाय 🌟
सिलिकॉन स्प्रेडर का उपयोग
कैसे मदद करता है:
घोल की सतह तनाव (Surface Tension) कम करता है, जिससे पत्तियों पर बेहतर कवरेज मिलता है।
कठोर या रेशेदार पत्तियों (हार्ड-टू-वेट) पर भी स्प्रे का अच्छा फैलाव।
उपयोग:
अधिक मोमी या रोयेंदार पत्ती वाले खरपतवारों पर।
ब्रॉड-स्पेक्ट्रम हर्बिसाइड (जैसे ग्लाइफोसेट) के साथ।
डोज: लेबल या निर्माता के निर्देशानुसार (आमतौर पर 0.5-1 ml प्रति लीटर)।
यूरिया का उपयोग
कैसे मदद करता है:
खरपतवार का मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है, जिससे सिस्टमिक हर्बिसाइड (जैसे ग्लाइफोसेट, 2,4-D) का अवशोषण बढ़ता है।
पत्तियों की वैक्स परत को नरम करके घोल के प्रवेश में सहायता करता है।
डोज:
आमतौर पर 1-2% (1-2 किग्रा यूरिया प्रति 100 लीटर पानी)।
ध्यान रखें:
बहुत ज़्यादा यूरिया → फसल में पत्तियों का झुलसन या ज़रूरत से ज़्यादा नाइट्रोजन।
हमेशा जार टेस्ट करें और फसल की सहनशीलता जांचें।
समय और मौसम
भोर या शाम को स्प्रे करें → कम तापमान व वाष्पीकरण में कमी से अधिक अवशोषण।
खरपतवार जब सक्रिय रूप से बढ़ रहे हों, तभी प्रभाव अधिक होता है।