15/05/2026
यह कहानी एक ऐसी माँ की नहीं है जो श्राप दे रही है, बल्कि यह कहानी है डिजिटल युग की एक कड़वी सच्चाई की।
एक छोटे से शहर के किनारे रहने वाली यह महिला अपनी गोद में अपने मासूम बच्चे को लिए खड़ी है। उसकी आँखों में वो दर्द नहीं है जो तस्वीर पर लिखे शब्दों में दिखाया गया है, बल्कि उसकी आँखों में अपनी गरीबी और लाचारी का सन्नाटा है। किसी ने उसकी और उसके बच्चे की तस्वीर खींचकर उसे इंटरनेट की दुनिया में एक "श्राप" बनाकर पेश कर दिया।
किसी माँ की ममता के शब्द नहीं हो सकते। यह उन लोगों की चालाकी है जो दूसरों के मन में डर पैदा करके अपने सोशल मीडिया पेज को बढ़ाना चाहते हैं। एक माँ कभी किसी दूसरे के बच्चे के लिए बुरा नहीं सोच सकती।