Bhuppi waldiya

Bhuppi waldiya Civil Engineering

29/08/2025

शराब आपको कंगाल बना रही है, ज़िंदगी नहीं।

दोस्तों, झूठ से बाज आओ।
ये अर्थव्यवस्था की बात नहीं है।
ये स्कूल की फीस की बात नहीं है।
ये तुम्हारा काम नहीं है।
तुम कंगाल हो क्योंकि तुम अपनी तनख्वाह शराब और नाइटलाइफ़ में उड़ा रहे हो।

आइए इसे समझते हैं:

1. शुक्रवार की रात - कोना क्लब में 4 हज़ार रुपये खर्च हो गए।

2. शनिवार की रात - न्यामा और ड्रिंक्स में 3 हज़ार रुपये खर्च हो गए।

3. उबर से घर - 1.5 हज़ार रुपये।

ये सिर्फ़ दो रातों में 8.5 हज़ार रुपये हुए। इसे चार वीकेंड से गुणा करें = हर महीने 34 हज़ार रुपये।
ये किराया है। ये स्कूल की फीस है। ये बिज़नेस कैपिटल है। इसके बजाय, तुमने इसे बीयर के झाग में उड़ा दिया।

और बदले में तुम्हें क्या मिला?

एक हैंगओवर।

कुछ धुंधली इंस्टाग्राम स्टोरीज़।

और रात के दो बजे जोकर की तरह "नितुमे क्वा टिल नंबर" चिल्लाने की शर्मिंदगी।

शराब एक खामोश चोर है:

4. यह आपके पैसे चूस लेती है।

5. यह आपकी उत्पादकता छीन लेती है (हैंगओवर = बर्बाद सुबह)।

6. यह आपकी सेहत को खा जाती है (40 की उम्र में अस्पताल के बिलों का बोझ)।

अगर आपका बारटेंडर आपको आपके मकान मालिक से बेहतर जानता है, तो आप जी नहीं रहे हैं—आप टूट रहे हैं।

7. वह 5 हज़ार की बोतल कल किसी को प्रभावित नहीं करेगी।

8. वह 3 हज़ार क्लब में प्रवेश आपका साम्राज्य नहीं बनाएगा।

9. वह "हर वीकेंड आने वाली" जीवनशैली ही वह वजह है जिसकी वजह से आप हर महीने कर्ज़ के लिए भीख माँग रहे हैं।

अनुशासन के बिना आनंद, डिज़ाइनर कपड़ों में गरीबी के समान है।

आखिरी चेतावनी:
अगर आप अपनी शराब पर नियंत्रण नहीं रखते, तो आपकी शराब आपके जीवन पर नियंत्रण रखेगी। जो आदमी बार में रहता है, वह कभी बार का मालिक नहीं बन सकता। इससे पहले कि आपके बच्चे आपके नाम की बजाय आपके कर्ज़ों को विरासत में पाएँ, अपनी विरासत को पीना बंद कर दें।

28/08/2025

थोड़ा धीरे चलो, लेकिन सही दिशा में चलो - रफ्तार से नहीं, दिशा से फर्क पड़ता है।

22/07/2025

याद रखना, अगर आदतें नहीं बदली, तो वक़्त कभी नहीं बदलेगा...

18/01/2024

क्या समय 'बर्बाद' होता है?

सुबह उठो, खाओ, फिर खाओ, रात में खाओ, देर रात मन कर जाए फिर खा लो और सो जाओ । फिर अगले दिन, उससे अगले दिन, हफ्ते, महीनों, हर रोज़ ज़िंदगी ऐसी ही चल रही है । लोग नकारा, नालायक, आलसी, बेरोजगार, काम का ना काज का... जो मन सो कह रहे हैं, कहने दो ।

लोगों को लगेगा आप समय बर्बाद कर रहे हैं । जो इस हाल में होते ही हैं उनके बारे में लोग यही सब तो कहते हैं । उस दौरान आप क्या क्या सोच रहे हो, कैसी कोशिशें कर रहे हो, कैसा महसूस कर रहे हो, किस किस के सही चेहरे देख पा रहे हो, अपना कहने वालों को केंचुली निकाल कर सांप बनता देख रहे हो, ये कोई नहीं समझेगा, सबको लगेगा आप समय बर्बाद कर रहे हो ।

सबकी छोड़ो, आप अपनी बताओ, क्या लगता है आपको? क्या आप सच में समय बर्बाद कर रहे हो? 'समय बर्बादी क्या होती है' जैसे विषय पर कोई महान किताब लिखी गई हो तो पता नहीं मगर अपनी सोच से कहूं तो मुझे नहीं लगता कि समय बर्बादी जैसी कोई चीज़ होती है ।

जब हम कुछ सीख रहे होते हैं तो कभी समय बर्बाद नहीं होता और हम हमेशा कुछ न कुछ सीखते ही हैं । एक इंसान खुद को महीनों एक कमरे में बंद कर के तब भी उसका समय बर्बाद नहीं होगा ।

उस दौरान वो अकेलेपन का अर्थ समझेगा, छिपकलियों, चूहों, कीड़ों और मच्छरों से जान पहचान बढ़ाएगा, खिड़की से आने वाली धूप की चाल समझेगा, बाहर के शोर को नज़रंदाज़ कर के अपने अंदर की आवाज़ को सुनना सीखेगा, इसके साथ ही वो ऐसा बहुत कुछ सीखेगा जिसके बारे में वो उस कमरे में बंद होने से पहले कुछ नहीं जानता था । जब वो उस कमरे से निकलेगा तब इसके पास ऐसा ज्ञान होगा जिसके दम पर वो अकेले आगे बढ़ने और अकेले मुश्किलों से लड़ने से फिर कभी नहीं डरेगा ।

ऐसा समय किसी पर ना ही आए तो अच्छा, मगर कहीं आ जाए तो दिमाग पर लोड लेने की जरूरत नहीं । माना ज़िंदगी छोटी है मगर इतनी भी नहीं कि कुछ समय तक कुछ ना करने से समय बर्बाद हो जाए ।

एक सच ये भी है जितने भी महान लोग हुए उन्होंने खुद को महान साबित करने वाले बड़े काम तभी किए जब उन्होंने खुद के साथ समय बिताया, दुनिया से दूर हो कर लोगों को ये कहने का मौका दिया कि 'फलाना तो अपना समय बर्बाद कर रहा है ।'

दुनिया की नजरों में गधा मजदूरी ही काम है, उन्हें लगता है बिना पसीना बहाए मेहनत नहीं होती । वो आगे बढ़ने के अन्य रास्तों को नहीं समझते । कामयाब की कामयाबी पर तालियां बजाते हैं लेकिन उनके तरीकों को बेवकूफी का नाम देते हैं ।

04/09/2023
 #ख़्वाबों              की           #एक्सपायरी हर ख़्वाब की भी एक उम्र होती हैहर उम्र के अलग ही ख़्वाब होते हैऔर बक्त र...
13/04/2023

#ख़्वाबों
की
#एक्सपायरी

हर ख़्वाब की भी एक उम्र होती है
हर उम्र के अलग ही ख़्वाब होते है
और बक्त रहते ये पूरे हो गए तो ठीक
नहीं तो इनकी भी एक्सपायरी होती है

बचपन में नया बस्ता भी ख़्वाब था
नया जूता भी आसमां से कम न था
फिर नौकरी के ख़्वाब आने लगे
फिर पैसा कमाने, घर बसाने....

ख़्वाब बदलते रहे,साल गुजरते गए
बड़ा घर, बड़ी गाड़ी,शान शौकत
बस ख़्वाब बनते बिगड़ते रहें
हम इनमें ही उलझते रहे

अब जब उम्र सताने लगी
अपनी काया ही भारी लगने लगी
ख़्वाब फ़िर से छोटे होने लगे
छोटा सा घर, छोटी छोटी खुशियां
रह गए हम बूढ़े और बुढ़िया

तो यारों बक्त पर ख़्वाब जी लिया करो
एक्सपायरी का इंतजार न किया करो
बाद में पूरे हो जाए,वो मजा नहीं आएगा
एक्सपेयरी से स्वाद बिगड़ ही जायेगा

30/03/2023

सरकारी नौकरी से रिटायर होते ही समाज की याद आने लगती है ऑन ड्यूटी पर समाज में से बदबू आती है। थानेदार, IPS, IRS पटवारी, डॉक्टर, मास्टर जी कड़वा है मगर सच है

30/03/2023

आपके पास मारुति हो या बीएमडब्ल्यू - - रोड वही रहेगी, आप इकॉनामी क्लास में सफर करे या बिज़नस में, - आपका वक्त तो उतना ही कटेगा, आप टाइटन पहने या रोलेक्स, - समय वही रहेगा, आपके पास एप्पल हो या सेमसंग - आपको कॉल लगाने वाले लोग नहीं बदलेंगे..

भव्य जीवन की लालसा रखने या जीने में कोई बुराई नहीं हैं, लेकिन सावधान रहे क्योंकि जरूरते पूरी हो सकती हैं, तृष्णा नहीं ! एक सच ये भी है कि पैसे वालो का आधा पैसा तो ये जताने में चला जाता है की वे भी पैसे वाले है..

30/03/2023

याद रखिये

अगर आप किसी को रोशनी दिखाने के लिए दीपक जलाएंगे तो उजाला आप के सामने भी होगा।

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