19/04/2026
अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का अत्यंत शुभ और पवित्र दिन माना जाता है। “अक्षय” का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो अर्थात जो सदा बढ़ता रहे। इस दिन किए गए पुण्य, दान, जप और शुभ कार्य अनंत फल देने वाले माने जाते हैं। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है और बिना किसी मुहूर्त के ही सर्वश्रेष्ठ शुभ दिन माना जाता है।
इस दिन को मनाने के पीछे कई पौराणिक मान्यताएँ हैं। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसी दिन महाभारत का लेखन महर्षि वेदव्यास जी ने भगवान गणेश से आरंभ करवाया था। मान्यता यह भी है कि इसी दिन माता गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। कुबेर को इसी दिन धन की प्राप्ति हुई और सुदामा ने श्रीकृष्ण को चावल भेंट किए, जिससे उनका जीवन अक्षय समृद्धि से भर गया।
अक्षय तृतीया की शुरुआत किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं की गई, बल्कि यह सनातन परंपरा का हिस्सा है जो वैदिक काल से चली आ रही है। यह दिन प्रकृति, धर्म और समृद्धि के संतुलन का प्रतीक है।
इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कई लोग भगवान श्रीकृष्ण और परशुराम जी की भी आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन विष्णु-लक्ष्मी की कृपा से धन, सुख और वैभव में कभी कमी नहीं आती।
पूजन के समय यह श्लोक अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है
“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
भगवान विष्णु के लिए यह स्तोत्र अत्यंत शुभ है
“शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥”
माता लक्ष्मी की कृपा के लिए यह स्तुति की जाती है
“नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते
शंखचक्र गदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तुते॥”
इस दिन सोना खरीदना, दान देना, नया कार्य आरंभ करना और जप-तप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन केवल धन प्राप्ति का ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक है, क्योंकि इस दिन किया गया हर सत्कर्म अक्षय फल देता है।
नमामीशमीशान
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