LABREH a group of farmers in Uttar Pradesh, our farming purely devoted to indian values & culture of food, Labreh won't use any kind of pesticide and chemical fertilisers in the crop process also use pure river water for irrigation. “पवित्र भोजन – आदर्श जीवन”
हम भारत के गाँवों में, अन्न सहेजने की प्राचीन पद्धति से जुड़कर, आज के आधुनिक युग में अनाज और दालों को विषैले प्रभावों से बचाने का प्रयास करत
े हैं; साथ ही बिना कैमिकल और विष का उपयोग किये भोजन को ‘भाव और जन–जन” की भारतीय भावनाओं से सुरक्षित रखते हैं, हम बाज़ार पद्धति के अनुरूप कार्य नहीं करते, लब्रेह के उत्पाद बाज़ार में कहीं भी उपलब्ध नहीं हैं I हम चुने हुए कुछ प्रकृति प्रेमियों को ही अपने उत्पाद देने में समर्थ हैं, क्योकि लब्रेह अपनी सीमित क्षमताओं के कारण बाज़ार की मांग पूरी करने में सक्षम नहीं है, जिस पद्धति से प्राचीन समय में ग्रामीण अनाज को अपने कुटम्ब के लिए सुरक्षित रखते थे, उस पद्धति के अनुरूप अनाज संरक्षण की पूरी प्रक्रिया को बड़ी सावधानी से अपनाया जाता है, खेत की तैयारी से लेकर अनाज उगाने, उसके पकने से लेकर भण्डारण करने तक, फ़सल बोने के पहले साल में कुछ समय के लिए जोत कर खेत खाली छोड़ने से सूर्य की किरणे खेत के बैक्टीरिया समाप्त कर देती हैं, सूरज की उर्जा से सिंचित मिट्टी में फसल को दिव्य एवं अद्भुत पोषण मिलता है जो किसी भी उर्वरक से संभव नहीं है,
फसल की सिचाई गंदे नाले या रासायनिक कचरे के पानी से नहीं होती क्योकि दूषित पानी के हानिकारक तत्व, फसल की पवित्रता को नष्ट कर देते हैं, और इससे अन्न का मौलिक गुण दूषित हो जाता हैं इसलिए खेत में नदी, या कुएं के साफ़ पानी का उपयोग होता हैं, कीटनाशक की तरह नीम का उपयोग, फसलों में केवल गोबर और हरी पत्तियों के खाद का उपयोग करने से फसल पूरी तरह मूल प्राकृतिक रूप में अन्न देती हैं, धरती और प्रकृति के अनमोल उपहार जैसे दिव्य-अन्न का भण्डारण भी बड़े जतन से करना होता है क्योंकि प्रकृति से प्राप्त नेचुरल पदार्थ में उपस्थित पौषक तत्व विष मुक्त होते हैं जिन्हें घुन, सुड्डी या बैक्टेरिया बहुत जल्दी ख़राब कर सकते हैं इसलिए बिना ज़हरीले पदार्थों के पोषक अन्न को सहेजना थोडा मुश्किल होता हैं, हम नीम, सरसों के तेल जैसे प्राकृतिक संसाधनों के साथ अन्न को समय – समय पर सूर्य की धुप दिखा कर सुरक्षित रखते हैं I हम सीमित संसाधनों के साथ निरंतर, भोजन की पवित्रता एवं उत्कृष्टता को संजोने में प्रयासरत हैं, साथ ही लब्रेह का पूरा अन्न संरक्षण प्रोसेस मानवीय गतिविधियों से पूर्ण होता है, हमारे ग्रामीण भाई – बहन पूरी श्रद्धा से भोजन के भाव को जी कर लब्रेह के उत्पादों को प्रकृति - समय और कार्यकुशलता के तालमेल से प्राप्त परिणाम के रूप में सहेजते हैं,
हमारे कुछ चुनिन्दा प्रकृति प्रेमी (रजिस्टर्ड सदस्य) जिन्हें लब्रेह अपने उत्पाद भेजता है, लब्रेह परिवार वर्षों से उनके भोजन को उत्कृष्टता देते हुए, हाथों से चुने गेंहू, दाल, चावल, चना, मटर के साथ घर जैसा सरसों का तेल, गुड़ और हल्दी, सौंफ, धनिया, मिर्च, आटा, भैंस के दूध का घी जैसे प्राकृतिक पदार्थ अपने परिवार की तरह भेज रहा हैं I
कार्यकुशलता और समर्पण के साथ कार्य करने की अपनी सहज गति होती है, हम अपने उच्चतम आदर्शों को बरक़रार रखते हुए धीरे–धीरे विस्तार कर रहे है, लब्रेह बाज़ारवाद की दौड़ से दूर, विशुद्ध नैतिक मूल्यों के साथ भोजन के भाव को समर्पित ग्रामीण संस्था है, हमारे सीमित संसाधन हमेशा सीमित ही रहेंगे क्योंकि प्रकृति दुरूपयोग की इज़ाजत नहीं देती, लब्रेह अपने सम्मानित सदस्यों को भी उनकी ज़रूरत से अधिक उत्पाद नहीं देता, परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर सुनिश्चित उत्पाद ही देने की लब्रेह नीति अन्न के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति कृतिज्ञता को पोषित करती हैं I