08/02/2026
दो परिवार 👨👩👧👦🙏
कमजोर आदमी ही क्रोध करता है। क्रोध से दूसरे का नुकसान होगा या नहीं ये तो पता नहीं पर खुद का जरूर होता है। क्रोध करना मतलब जलते हुए अंगारे किसी पर फेंकना। सामने वाला जलेगा या नहीं पर खुद का हाथ जरूर जल जाएगा।
अच्छा, क्रोध का एक भरा-पूरा परिवार है। क्रोध का बड़ा भाई है अहंकार। जब अहंकार को चोट लगती है तो झट से छोटा भाई क्रोध निकल के आ जाता है पहले बड़े भाई का पक्ष लेने। क्रोध की पत्नी का नाम हिंसा है। पति को अकेले लड़ते देख उसकी पत्नी हिंसा आ जाती है। क्रोध में आदमी हिंसक हो जाता। क्रोध में मारपीट पर उतर आता है। साथ ही इसकी एक नकचढ़ी बहन जिद है जो भाई का साथ देने आ जाती है। आदमी जिद्दी हो जाता है क्रोध के समय। कहता है आज मैं नहीं या ये नहीं, अभी फैसला होगा। ये तो हुआ गुस्से का परिवार।
शास्त्रों में एक आध्यात्मिक परिवार का भी वर्णन मिलता है। आदमी इस परिवार में रहे तो आनंद चैन से रहेगा। इसमें धैर्य को पिता बताया गया है। जैसे एक पिता कहता है धैर्य रखो सब ठीक हो जाएगा, वैसे ही आदमी को हर स्थिति परिस्थिति में धैर्य रखना चाहिए। क्षमा को माता कहा गया है। माँ कहती है-अरे छोड़ो भाई, आगे बढ़ो, जो हो गया सो हो गया। माफ करो और आगे बढ़ो। शांति को पत्नी माना गया है। कोई छोटी बड़ी बात हो जाती है तो पत्नी कहती है-शांति रखो, ठंड रखो, जाने दो। सत्य को पुत्र कहा गया है। जैसे पुत्र की कदम-कदम पर रक्षा करनी पड़ती है वैसे ही सत्य की भी रक्षा करनी पड़ती है। सत्य बोलो, सत्य आचरण करो। हाँ! सत्य लेकिन हितकारी और मधुर होना चाहिए, भण्डा फोड़ नहीं। संयम को अपना भाई बनाए वो हर कदम कदम पर भाई की तरह आपका साथ देगा। शील और लज्जा दो बहनें भी हैं आध्यात्मिक परिवार में हर हाल में इनकी रक्षा की जानी चाहिए। ऐसे आध्यात्मिक परिवार में रहा जाए तो आनंद ही आनंद है। हालांकि है जरा मुश्किल फिर भी प्रयास करने में क्या बुराई है।
📝 सीख:
जीवन में सुख-शांति के लिए हमें क्रोध, अहंकार, और हिंसा जैसे नकारात्मक भावों का त्याग कर धैर्य, क्षमा, शांति, सत्य, और संयम जैसे आध्यात्मिक गुणों को अपनाना चाहिए।
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