03/11/2025
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#लड़की_हू_लड़_सकती_हूं।
अभी कुछ दिन पहले ही इन लड़कियों को कहा जा रहा था, “अरे तुम्हारा काम तो किचन में रहना है, तुम वहीं जाओ, क्रिकेट नहीं खेल पाओगी।” अपनी लड़कियाँ एक- दो मैच क्या हार गईं थीं, इन्हें ताने दिए गए। लोगों ने कहा, “इनकी फीस काट देनी चाहिए”। जिसको जैसा मन किया उसने वैसे ताने इनको फेंक के मारे।
लेकिन जरा सोचिए, कौन है ये लड़कियां। एक लड़की है जिसके पापा बढ़ई हैं, जब लोगों ने उसको क्रिकेट खेलने से मना किया तो उसके पापा ने अपने हाथों से बैट बनाकर दिया- जाओ बेटी खेलो। हिमाचल की रेणुका रोहड़ू के एक छोटे से गांव से आती हैं- उनके पिता की मृत्यु तब हो गई थी जब वो 3 साल की थीं, उनकी माँ ने ये सपना बुनने में उनकी मदद की। क्रांति गौर- बुंदेलखंड की एक छोटी सी जगह से हैं, टेनिस बॉल से खेलते- खेलते यहाँ तक पहुँची। ये सारी लड़कियाँ- सामान्य परिवारों से आती हैं। अपने सपनों के लिए लड़ती हैं, भिड़ती हैं, गिरती हैं, उठती हैं। कोई राजा- महाराजा- सांसद- विधायक की बेटी नहीं है। ये करोड़ों भारतीय लड़कियों के लिए वो फसल बो रही हैं, जो आने वाले कई सालों तक लहलहाएगी।
इनके गिरने पर ताने मत दीजिये, अगर दे सकते हैं- तो हाथ बढ़ाइए- साथ दीजिये। क्योंकि जीत के दिन साथ देने वालों की लंबी लाइन में खड़े होना ही पड़ेगा। और इनकी जीत तय है।
इन आम भारतीय परिवारों की लड़कियों ने…इतिहास बना दिया।💐💐💐💐