10/05/2026
एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। गाँव पहाड़ों के बीच बसा था, जहाँ सुबह की धूप खेतों पर सोने जैसी चमकती थी। अर्जुन का सपना था कि वह बड़ा होकर अपने गाँव का नाम रोशन करे, लेकिन लोग उसकी गरीबी देखकर उसका मज़ाक उड़ाते थे।
अर्जुन के पिता एक किसान थे। बारिश कम होने के कारण फसलें खराब हो जातीं और घर चलाना मुश्किल हो जाता। फिर भी अर्जुन हर रात लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता। उसकी माँ अक्सर कहती,
“मेहनत करने वाले की हार कभी नहीं होती।”
एक दिन गाँव में खबर आई कि शहर में विज्ञान प्रतियोगिता होने वाली है। जीतने वाले को बड़ी छात्रवृत्ति मिलेगी। अर्जुन ने भाग लेने का फैसला किया। उसने पुराने सामान से पानी बचाने वाली एक छोटी मशीन बनाई, जो खेतों में कम पानी में भी सिंचाई कर सकती थी।
गाँव वाले हँसने लगे।
“ये लड़का शहर वालों से मुकाबला करेगा?” वे कहते।
लेकिन अर्जुन ने हार नहीं मानी। प्रतियोगिता के दिन वह अपनी मशीन लेकर शहर पहुँचा। वहाँ बड़े-बड़े स्कूलों के छात्र आए थे, जिनके पास महंगे मॉडल और आधुनिक उपकरण थे। अर्जुन थोड़ी देर के लिए डर गया, मगर उसे माँ की बात याद आई।
जब उसकी बारी आई, तो उसने आत्मविश्वास से अपनी मशीन का प्रदर्शन किया। जज उसकी सोच से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने देखा कि यह मशीन गाँवों के किसानों के लिए बहुत उपयोगी हो सकती है।
शाम को परिणाम घोषित हुए।
पहला पुरस्कार अर्जुन को मिला।
पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा। अर्जुन की आँखों में आँसू थे। उसने मंच से कहा,
“सपने अमीर या गरीब नहीं देखते, उन्हें पूरा करने की हिम्मत चाहिए।”
उस दिन के बाद अर्जुन सिर्फ अपने गाँव का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले का गर्व बन गया। और जो लोग कभी उसका मज़ाक उड़ाते थे, वही अब अपने बच्चों को उसकी मिसाल देने लगे।