योगी संजय आर्य नेचुरल-पैथी

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12/02/2026




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29/01/2026

food



farming

29/01/2026

6 तरह की पाचक गोली रेसिपी (घर पर बनाने की विधि)
1️⃣ आमचूर पाचक गोली

सामग्री:

आमचूर पाउडर – 1 कप

पिसी चीनी – ½ कप

काला नमक – 1 छोटी चम्मच

भुना जीरा पाउडर – 1 छोटी चम्मच

सौंफ पाउडर – ½ छोटी चम्मच

नींबू का रस – जरूरत अनुसार

विधि:
सभी सूखी सामग्री मिलाएं। थोड़ा-थोड़ा नींबू रस डालकर सख्त मिश्रण बनाएं। छोटी गोलियां बनाकर छांव में सुखा लें।

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2️⃣ इमली की गटक

सामग्री:

इमली – 1 कप

चीनी – ¾ कप

काला नमक – ½ छोटी चम्मच

सोंठ पाउडर – ½ छोटी चम्मच

लाल मिर्च – ¼ छोटी चम्मच

विधि:
इमली और चीनी पीस लें। मसाले मिलाकर हाथ से गोलियां बनाएं। धूप में अच्छी तरह सुखाएं।

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3️⃣ अनारदाना गोली

सामग्री:

अनारदाना पाउडर – 1 कप

चीनी – ½ कप

काला नमक – ½ छोटी चम्मच

भुना जीरा – 1 छोटी चम्मच

नींबू रस – थोड़ा सा

विधि:
सभी सामग्री मिलाकर मिश्रण तैयार करें। गोलियां बनाकर छांव में सुखा लें।

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4️⃣ नींबू चाट गोली

सामग्री:

सूखा नींबू छिलका पाउडर – ½ कप

चीनी – ½ कप

काला नमक – ½ छोटी चम्मच

चाट मसाला – 1 छोटी चम्मच

विधि:
सभी चीज़ें मिलाकर थोड़ा रस डालें। गोलियां बनाएं और सुखा लें।

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5️⃣ अजवाइन वटी

सामग्री:

अजवाइन – 1 कप

काला नमक – 1 छोटी चम्मच

सोंठ पाउडर – ½ छोटी चम्मच

नींबू रस – जरूरत अनुसार

विधि:
अजवाइन दरदरी पीस लें। मसाले और रस मिलाकर वटी बनाएं। सुखा लें।

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6️⃣ जीरा गोली

सामग्री:

भुना जीरा पाउडर – 1 कप

चीनी – ½ कप

काला नमक – ½ छोटी चम्मच

नींबू रस – थोड़ा सा

विधि:
सब सामग्री मिलाकर गोलियां बनाएं। धूप या हवा में सुखाएं।

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✅ स्टोरेज टिप:

एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें, 2–3 महीने तक खराब नहीं होंगी।

29/01/2026

akhrot


kheti
Natural farming

05/06/2025

#कथावाचक
#राम
@राजीव दीक्षित फॉलोअर

10/03/2025

कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है।

*सोना*

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

*चाँदी*

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

*कांसा*

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*तांबा*

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

*पीतल*

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*लोहा*

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

*स्टील*

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।

*एलुमिनियम*

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

*मिट्टी*

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

पानी पीने के पात्र के विषय में 'भावप्रकाश ग्रंथ' में लिखा है....

*जलपात्रं तु ताम्रस्य तदभावे मृदो हितम्।*
*पवित्रं शीतलं पात्रं रचितं स्फटिकेन यत्।*
*काचेन रचितं तद्वत् वैङूर्यसम्भवम्।*
(भावप्रकाश, पूर्वखंडः4)

अर्थात् पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए।

07/02/2025

#देसी खांड #
सभी को नमस्ते वंदे मातरम साथियों कहीं आप भी देसी खांड के नाम पर या खांडश्री के नाम या ब्राउन शुगर के नाम पर वही चीनी की मिलावट वाला वाइट या ब्राउन शुगर तो नहीं खा रहे जिसमें लगभग 54% तक लोग चीनी मिला रहे हैं राजीव भाई दीक्षित को यूट्यूब पर या फेसबुक पर सुनकर लोग देसी खांड को तो अपना रहे हैं महंगे या सस्ते दामों पर खरीद कर लेकिन फिर भी वही नकली वाली खांड लगभग मिल रही है और इसके दो कारण है जो समाज में लोग व्यापारी बनकर खांड बेच रहे हैं उनको खुद को भी जानकारी नहीं है की असली खांड बनने कि प्रक्रिया क्या होती है और दूसरा जो कस्टमर होते है वह दुकानदार पर ज्यादा विश्वास करते हैं उनको तो देसी खांड की पहचान ही नहीं होती लेकिन खांड खरीद लेते हैं और जानकारी न होने के कारण ब्राउन शुगर को ही देसी खांड समझ लेते हैं आईए जानते हैं देसी खांड किस प्रक्रिया से तैयार होती है आपको वीडियो अच्छी लगे तो इस जानकारी को आगे भी पहुंचाए। मैंने वीडियो के माध्यम से दिखाने की कोशिश की है देसी खांड बनने की असली प्रक्रिया क्या होती है आप हमारे इस प्रयास को सफल कर सकते हैं

12/10/2024

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