27/08/2025
माइक्रो फाइनेंस सेक्टर में लक्ष्य का दबाव: कर्मचारियों की मजबूरी और वास्तविकता
आज के समय में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का कामकाज केवल “फाइनेंस उपलब्ध कराना” तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक “लक्ष्य आधारित दबाव” का खेल बन चुका है। कंपनियाँ अपने स्टाफ और ब्रांचों को लगातार उच्च लक्ष्य (Target) देती हैं और उसे किसी भी हाल में पूरा करने की अपेक्षा रखती हैं।
ऊपर दिए गए संदेश से साफ झलकता है कि कैसे 14 अगस्त से 25 अगस्त के बीच “प्रपोजल/ऐडिंग” का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और यह सीधा DMD/MD स्तर तक रिपोर्ट हो चुका है। इसके दबाव में सभी ब्रांच मैनेजर और फील्ड स्टाफ को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
1. लक्ष्य का दबाव
संदेश में साफ लिखा गया है कि अगर यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो कंपनी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि हर स्टाफ को, चाहे जैसे भी हो, लक्ष्य प्राप्त करना ही है।
2. कर्मचारियों की स्थिति
स्टाफ पर सुबह से लेकर देर रात तक काम करने का दबाव।
छुट्टियाँ या व्यक्तिगत जीवन लगभग खत्म।
फील्ड में लगातार दौड़-भाग और नए कस्टमर जोड़ने का बोझ।
अगर लक्ष्य पूरा न हो तो नौकरी असुरक्षित हो जाती है।
3. कंपनी और सिस्टम की सच्चाई
कंपनी के उच्च अधिकारी (DMD/MD) केवल रिपोर्ट और आंकड़े देखते हैं। असल में फील्ड स्टाफ और ब्रांच स्तर पर काम करने वालों की मुश्किलें उनकी नज़र से बाहर रहती हैं।
Minus ALC (Average Loan Collection) को सुधारने का बोझ स्टाफ पर डाला जाता है।
“एक्स्ट्रा समय देकर काम करो” जैसी बातें कर्मचारियों से अमानवीय श्रम करवाने का संकेत हैं।
4. परिणाम
कर्मचारियों का मानसिक दबाव और स्वास्थ्य पर बुरा असर।
फील्ड स्टाफ की सुरक्षा खतरे में पड़ना (लंबे समय तक बाइक से यात्रा, बारिश/गर्मी की परवाह किए बिना काम)।
परिवार और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव।
लंबे समय में कर्मचारियों में असंतोष और नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति।
5. समाधान की दिशा
कंपनियों को चाहिए कि लक्ष्य तय करते समय जमीनी वास्तविकताओं को समझें।
फील्ड स्टाफ के लिए मानव-केंद्रित नीतियाँ बनाई जाएँ।
हर हफ्ते/महीने केवल टारगेट बढ़ाना ही समाधान नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण, मोटिवेशन और कर्मचारियों की सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।
कर्मचारियों की मेहनत और सीमाओं को समझकर, उन्हें भी “फाइनेंशियल इंस