माइक्रो फाइनेंस हल्ला बोल

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माइक्रो फाइनेंस हल्ला बोल 25/08/2025

17/09/2025

🌟 महत्वपूर्ण सूचना | Team Leader की आवश्यकता 🌟
*श्रमज्योति फाउंडेशन*
हमारी संस्था को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में सक्रिय और समर्पित Team Leader की आवश्यकता है।
इस पद को हम "जिला अध्यक्ष (District President)" के नाम से पुकारेंगे।

🔸 योग्यता :
✔️ माइक्रो फाइनेंस सेक्टर में अनुभव रखने वाले।
✔️ नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी समझने वाले।
✔️ टीम को मार्गदर्शन देने और संगठन को आगे बढ़ाने का जुनून रखने वाले।

📌 जिम्मेदारियाँ :
✅ जिला स्तर पर टीम का संचालन।
✅ कर्मचारियों और फील्ड स्टाफ की मदद और मार्गदर्शन।
✅ क्षेत्रीय योजना बनाना और उसका कार्यान्वयन।
✅ समस्याओं को समझकर समाधान प्रस्तुत करना।

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👉 आइये साथ मिलकर बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाएं।

28/08/2025
27/08/2025

माइक्रो फाइनेंस की मनमानी
हर रविवार जबरदस्ती वर्क कराना नहीं चलेगा नहीं चलेगा
8 घंटे से 10 घंटे तक ही काम करना उससे ऊपर नहीं चलेगा नहीं चलेगा
काम को लेकर फोर्स फूली काम करवाना नहीं चलेगा नहीं चलेगा
हर बात पे टर्मीनेशन का धमकी देना नहीं चलेगा नहीं चलेगा
अगर कोई स्टाफ अगर त्याग पत्र देना चाहता है तो उसको फ़साना और उसको टर्मीनेशन करना सैलरी होल्ड करना नहीं चलेगा नहीं चलेगा
हर माइक्रो फाइनेंस ऑफिस को रेजिडेंट से मुक्त करना

संगठन
श्रम ज्योति फाउंडेशन
ऑल इंडिया
आपका भाई रत्नेश गुप्ता
(9559808020)

माइक्रो फाइनेंस सेक्टर में लक्ष्य का दबाव: कर्मचारियों की मजबूरी और वास्तविकताआज के समय में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का ...
27/08/2025

माइक्रो फाइनेंस सेक्टर में लक्ष्य का दबाव: कर्मचारियों की मजबूरी और वास्तविकता

आज के समय में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का कामकाज केवल “फाइनेंस उपलब्ध कराना” तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक “लक्ष्य आधारित दबाव” का खेल बन चुका है। कंपनियाँ अपने स्टाफ और ब्रांचों को लगातार उच्च लक्ष्य (Target) देती हैं और उसे किसी भी हाल में पूरा करने की अपेक्षा रखती हैं।

ऊपर दिए गए संदेश से साफ झलकता है कि कैसे 14 अगस्त से 25 अगस्त के बीच “प्रपोजल/ऐडिंग” का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और यह सीधा DMD/MD स्तर तक रिपोर्ट हो चुका है। इसके दबाव में सभी ब्रांच मैनेजर और फील्ड स्टाफ को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।

1. लक्ष्य का दबाव

संदेश में साफ लिखा गया है कि अगर यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो कंपनी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि हर स्टाफ को, चाहे जैसे भी हो, लक्ष्य प्राप्त करना ही है।

2. कर्मचारियों की स्थिति

स्टाफ पर सुबह से लेकर देर रात तक काम करने का दबाव।

छुट्टियाँ या व्यक्तिगत जीवन लगभग खत्म।

फील्ड में लगातार दौड़-भाग और नए कस्टमर जोड़ने का बोझ।

अगर लक्ष्य पूरा न हो तो नौकरी असुरक्षित हो जाती है।

3. कंपनी और सिस्टम की सच्चाई

कंपनी के उच्च अधिकारी (DMD/MD) केवल रिपोर्ट और आंकड़े देखते हैं। असल में फील्ड स्टाफ और ब्रांच स्तर पर काम करने वालों की मुश्किलें उनकी नज़र से बाहर रहती हैं।

Minus ALC (Average Loan Collection) को सुधारने का बोझ स्टाफ पर डाला जाता है।

“एक्स्ट्रा समय देकर काम करो” जैसी बातें कर्मचारियों से अमानवीय श्रम करवाने का संकेत हैं।

4. परिणाम

कर्मचारियों का मानसिक दबाव और स्वास्थ्य पर बुरा असर।

फील्ड स्टाफ की सुरक्षा खतरे में पड़ना (लंबे समय तक बाइक से यात्रा, बारिश/गर्मी की परवाह किए बिना काम)।

परिवार और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव।

लंबे समय में कर्मचारियों में असंतोष और नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति।

5. समाधान की दिशा

कंपनियों को चाहिए कि लक्ष्य तय करते समय जमीनी वास्तविकताओं को समझें।

फील्ड स्टाफ के लिए मानव-केंद्रित नीतियाँ बनाई जाएँ।

हर हफ्ते/महीने केवल टारगेट बढ़ाना ही समाधान नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण, मोटिवेशन और कर्मचारियों की सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।

कर्मचारियों की मेहनत और सीमाओं को समझकर, उन्हें भी “फाइनेंशियल इंस

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