17/01/2024
तुम्हें अपना बनाने का जुनून
सर पे है, कब से है
मुझे आदत बना लो इक बुरी
कहना ये तुमसे है
तुम्हें अपना बनाने का जुनून
सर पे है, कब से है
सर पे है, कब से है
जिस्म के समंदर में
इक लहर जो ठहरी है
उस में थोड़ी हरकत होने दो
शायरी सुनती इन दो नशीली आँखों को
मुझको पास आके पढ़ने दो
इश्क़ की ख़्वाहिशों में
भिगलूँ बारिशों में, आओ ना
तुम्हें पा कर ना खोने का जूनून
सर पे है, कब से है
मुझे नज़रों में रखलो तुम कहीं
कहना ये तुमसे है
तुम्हें अपना बनाने का जुनून
सर पे है, कब से है
सर पे है, कब से है
रोकना नहीं मुझको
ज़िद पे आ गयी हूँ मैं
इस कदर दीवानापन चढ़ा
देखो ना यहाँ आके
मेरा हाल कैसा है
टूट के अभी तक ना जुड़ा
अब संभालना नहीं है
जो भी है वो सही है, आओ ना
तुम्हें खुद से मिलाने का जूनून
सर पे है, कब से है
मुझे रहने दे अपने पास ही
कहना ये तुमसे है
तुम्हें अपना बनाने का जुनून
सर पे है, कब से है
सर पे है, कब से है