17/07/2026
Lano (Sumi Lano) कीट नाशक (Insecticide) कॉटन (कपास) की फसल के लिए एक बहुत ही बेहतरीन और आधुनिक दवा है। इसमें मुख्य टेक्निकल Pyriproxyfen 10% EC होता है।
कपास की खेती में यह मुख्य रूप से सफेद मक्खी (Whitefly) के नियंत्रण के लिए सबसे असरदार मानी जाती है। आइए समझते हैं कि यह कॉटन में किस प्रकार काम करती है: #
IGR (Insect Growth Regulator): लानो एक कीट विकास अवरोधक (Insect Growth Regulator) है। यह पारंपरिक कीटनाशकों की तरह कीड़ों को तुरंत संपर्क में आते ही नहीं मारता, बल्कि उनके जीवन चक्र (Life Cycle) को तोड़ देता है।
अंडों को नष्ट करना (Ovicidal Action): जब इसका स्प्रे कपास की पत्तियों पर किया जाता है, तो यह सफेद मक्खी के अंडों को निष्क्रिय कर देता है, जिससे उनमें से बच्चे (Nymphs) नहीं निकल पाते।
शिशु अवस्था (Nymphs) पर वार: यह सफेद मक्खी के बच्चों (Nymphs) को अगली वयस्क (Adult) अवस्था में बदलने से रोक देता है। वे उसी अवस्था में मर जाते हैं।
बांझपन (Sterility in Adults): यदि कोई वयस्क सफेद मक्खी इस दवा के संपर्क में आती है, तो उसकी अंडा देने की क्षमता खत्म हो जाती है या उसके द्वारा दिए गए अंडों से बच्चे नहीं
सफेद मक्खी और उसके बच्चे ज्यादातर कपास की पत्तियों के निचली तरफ छिपे रहते हैं, जहाँ सीधी दवा पहुंचना मुश्किल होता है। लानो में ट्रांसलैमिनर गुण होता है, जिसका मतलब है कि अगर दवा पत्ती के ऊपरी हिस्से पर गिरती है, तो यह पत्ती को भेदकर नीचे की सतह तक अपने आप पहुँच जाती है और छिपे हुए कीड़ों को खत्म करती है।
चूंकि यह सफेद मक्खी की आने वाली पीढ़ियों (अंडों और शिशुओं) को खत्म कर देता है, इसलिए इसका असर खेतों में लंबे समय तक (लगभग 15 से 20 दिनों तक) रहता है। इससे बार-बार स्प्रे करने का खर्चा बचता है।
मित्र कीटों के लिए सुरक्षित (Eco-Friendly)
कपास की फसल में कई ऐसे मित्र कीट होते हैं जो हानिकारक कीड़ों को खाते हैं (जैसे लेडीबर्ड बीटल, क्रायसोपा)। लानो इन मित्र कीटों को नुकसान नहीं पहुँचाता, जिससे पर्यावरण और फसल दोनों सुरक्षित रहते हैं।
प्रयोग करने का सही समय और मात्रा
सही समय: जब कपास की फसल में सफेद मक्खी के बच्चों (Nymphs) का शुरुआती प्रकोप दिखाई दे, तभी इसका स्प्रे कर देना चाहिए। वयस्क मक्खियों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ने का इंतजार न करें।
डोज (मात्रा): सामान्यतः कपास के लिए 400 से 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा पर्याप्त होती है, जिसे लगभग 150-200 लीटर पानी में मिलाकर अच्छी तरह स्प्रे करना चाहिए।