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27/02/2025

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*"पुलिस प्रशासन राजस्थान"**द्वारा एक अपील**"अभिभावक बच्चों को स्कूल में शिक्षक द्वारा डांटने पीटने पर बुरा ना माने , ये ...
15/02/2025

*"पुलिस प्रशासन राजस्थान"*
*द्वारा एक अपील*

*"अभिभावक बच्चों को स्कूल में शिक्षक द्वारा डांटने पीटने पर बुरा ना माने , ये बात समझे कि बच्चे की स्कूल में पिटाई अंत में पुलिस की पिटाई ठुकाई से अच्छी है,"*

अनुशासन के लिए प्रसिद्ध स्कूलों में विद्यार्थियों के हेयर स्टाइल और उनकी चाल-ढाल को लेकर चाहे कितनी भी सख़्ती की जाए, उनके व्यवहार में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। शिक्षक निराश होकर केवल देखते रह जाते हैं, लेकिन कुछ नहीं कर पाते।

यदि माता-पिता का बच्चों पर ध्यान और नियंत्रण कम हो जाए, तो वे इस प्रकार के व्यक्तियों में तब्दील हो जाते हैं।

अनुशासन केवल बातों से नहीं आता; थोड़ा डर और सजा भी जरूरी है।

बच्चों को स्कूल में डर नहीं है,
घर लौटने पर भी डर नहीं है,
इसीलिए समाज आज भयभीत हो रहा है।
वही बच्चे आज गुंडे बनकर लोगों पर हमला कर रहे हैं।
उनके व्यवहार से कई लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
उसके बाद वे पुलिस के हाथ लगते हैं और अदालत में सजा पाते हैं।

*“गुरु का सम्मान न करने वाला समाज नष्ट हो जाता है।”*
*"यह सत्य है"*

गुरु का न भय है, न सम्मान। ऐसे में पढ़ाई और संस्कार कैसे आएंगे?

“मत मारो! मत डांटो! जो खुद नहीं पढ़ना चाहता उससे क्यों सवाल करो? यदि पढ़ने पर जोर दिया गया या काम कराया गया तो गलती शिक्षकों की होगी!”

पांचवीं कक्षा से ही अजीब हेयर स्टाइल, कटे हुए जींस, दीवारों पर बैठना और आते-जाते लोगों का मजाक उड़ाने की आदत बन जाती है।
यदि कोई कहे, “अरे सर आ रहे हैं!” तो जवाब होता है, “आने दो!”

कुछ माता-पिता तो यहां तक कहते हैं, “हमारा बच्चा न भी पढ़े तो कोई बात नहीं, लेकिन शिक्षक उसे मारें नहीं।”

जब उनसे पूछा जाता है कि “आपके बाल किसने काटे?” तो जवाब आता है, “हमारे पापा ने करवाया ऐसे, सर।”

बच्चों के पास पढ़ाई का सामान नहीं होता। पेन हो तो किताब नहीं, किताब हो तो पेन नहीं।
बिना डर के शिक्षा कैसे संभव है?
बिना अनुशासन के शिक्षा का कोई परिणाम नहीं।

स्कूल में गलती करने पर सजा नहीं दी जा सकती, डांटा नहीं जा सकता, यहां तक कि गंभीरता से समझाया भी नहीं जा सकता।
आज के माता-पिता चाहते हैं कि सबकुछ दोस्ताना माहौल में कहा जाए।
क्या यह संभव है?

क्या समाज भी ऐसा करता है?
पहली गलती करने पर क्षमा करता है?

अब शिक्षकों के अधिकार नहीं बचे हैं।
*यदि शिक्षक सीधे बच्चे को सुधारने की कोशिश करें, तो वह अपराध बन जाता है।*
*लेकिन वही बच्चा बड़ा होकर गलती करे तो उसे मृत्युदंड तक दिया जा सकता है।*

माता-पिता से एक विनती:
बच्चों के व्यवहार को सुधारने में शिक्षक मुख्य भूमिका निभाते हैं।
*कुछ शिक्षकों की गलती के कारण सभी शिक्षकों का अपमान न करें।*

*90% शिक्षक केवल बच्चों के अच्छे भविष्य की कामना करते हैं*।
यह सच है।

इसलिए आगे से हर छोटी गलती के लिए शिक्षकों पर आरोप न लगाएं।

हम जब पढ़ते थे, तब कुछ शिक्षक हमें मारते थे।
लेकिन हमारे माता-पिता स्कूल आकर शिक्षकों से सवाल नहीं करते थे।
वे हमारे कल्याण पर ही ध्यान देते थे।

पहले माता-पिता बच्चों को गुरु के महत्व को समझाने की जिम्मेदारी उठाएं।

बच्चों के भविष्य के बारे में एक बार सोचें।

बच्चों की बर्बादी के 60% कारण हैं – दोस्त, मोबाइल और मीडिया।
लेकिन बाकी 40% कारण माता-पिता ही हैं!

अत्यधिक प्रेम, अज्ञानता और अंधविश्वास बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं।

आज के 70% बच्चे –

👉 माता-पिता यदि कार या बाइक साफ करने को कहें तो नहीं करते। ओर बिना प्रयोजन की चीजें वो भी महंगी खरीदने की जिद करते हैं,
👉 बाजार से सामान लाने के लिए तैयार नहीं होते। अब तो ऑनलाइन ही मंगा लेते हैं। खरीददारी का तजुर्बा भी नहीं है।
👉 स्कूल का पेन या बैग सही जगह नहीं रखते।
👉 घर के कामों में मदद नहीं करते। और टीवी में कुछ से कुछ देखते रहते हैं।
👉 रात 10 बजे तक सोने की आदत नहीं और सुबह 6-7 बजे जागते नहीं।
👉 गंभीर बात कहने पर पलटकर जवाब देते हैं।
👉 डांटने पर चीजें फेंक देते हैं।
👉 पैसे मिलने पर दोस्तों के लिए खाना, आइसक्रीम और गिफ्ट्स पर खर्च कर देते हैं।
👉 नाबालिग लड़के बाइक चलाते हैं, दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं और केस में फंस जाते हैं।
👉 लड़कियां दैनिक कार्यों में मदद नहीं करतीं।
👉 मेहमानों के लिए पानी का गिलास तक देने का मन नहीं होता।
👉 20 साल की उम्र में भी कुछ लड़कियों को खाना बनाना नहीं आता।
👉 सही ढंग से कपड़े पहनना भी एक चुनौती बन गया है।
👉 फैशन, ट्रेंड और तकनीक के पीछे भाग रहे हैं।

इस सबका कारण हम ही हैं।
हमारा गर्व, प्रतिष्ठा और प्रभाव बच्चों को जीवन के पाठ नहीं सिखा पा रहे हैं।

“कष्ट का अनुभव न करने वाला व्यक्ति जीवन के मूल्य को नहीं समझ सकता।”

आज के युवा 15 साल की उम्र में प्रेम कहानियों, धूम्रपान, शराब, जुआ, ड्रग्स और अपराध में लिप्त हो रहे हैं।
दूसरे आलसी बनकर जीवन का कोई लक्ष्य नहीं रखते।

बच्चों का जीवन सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
यदि हम सतर्क नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी।

बच्चों के भविष्य और उनके अच्छे जीवन के लिए हमें बदलना होगा।

🙏 इस संदेश को पढ़ने वाले सभी लोग इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारोंके के साथ साझा करें।

“मुझे नहीं लगता कि हर कोई बदलेगा…
लेकिन मुझे भरोसा है कि कम से कम एक व्यक्ति तो बदलेगा।”

*शिक्षक रहम कर सकते हैं पुलिस नहीं*

*"पुलिस कि ठुकाई पिटाई और बाद में कोर्ट कचहरी तक पैसे खर्च होते हैं, शिक्षक की डाट डपट पर कोई खर्चा नहीं होता "*
*"पुलिस प्रशासन राजस्थान "*🙏

15/02/2025

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15/02/2025

Masti

😄😃😱😱सच्ची घटना पर अधारित।🥵🥵🥵     सिंगापुर के एक छोटे से गांव चंगी के पास स्थित एक अस्पताल जिसे चंगी अस्पताल के नाम से जा...
30/12/2024

😄😃😱😱सच्ची घटना पर अधारित।🥵🥵🥵
सिंगापुर के एक छोटे से गांव चंगी के पास स्थित एक अस्पताल जिसे चंगी अस्पताल के नाम से जाना जाता है, ऐसा ही एक स्थान है जहां भूत-प्रेतों का वास है. इस अस्पताल में जितने भी लोगों की जानें गईं आज वो एक आत्मा बनके यहां आने वाले हर इंसान को अपने पास ना आने की चेतावनी के तौर पर उन्हें डराती हैं.

अस्पताल से कब्रगाह बने चंगी अस्पताल का इतिहास

इस अस्पताल का निर्माण वर्ष 1930 में सैनिकों के इलाज के उद्देश्य से करवाया गया था. उस समय यह मिलिट्री अस्पताल हुआ करता था और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इस पर जापान का कब्जा हो गया था. उस समय हजारों की संख्या में जापान के घायल सैनिक इस अस्पताल में लाए गए थे. लेकिन उस समय मेडिकल सुविधाएं कुछ खास उपलब्ध नहीं होती थीं इसीलिए जितने सैनिक यहां भर्ती हुए थे उनमें से ज्यादातर की मौत हो गई थी. अस्पताल में हो रही इन्हीं मौतों के कारण एक भयानक बीमारी ने अस्पताल के सभी लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था. इस बीमारी की चपेट में आने के बाद कई नर्सों और चिकित्सकों की मौत हो गई थी और कहते हैं आज उन्हीं की आत्माएं इस अस्पताल में भटकती रहती हैं.

स्थानीय लोगों के अनुसार यह जगह मनहूस है और मृत आत्माओं की ताकतों को यहां बहुत आसानी से महसूस किया जा सकता है.

अस्पताल में एक नर्स के साये को अकसर देखा जाता है. कहते हैं एक जवान का इलाज करते समय उस नर्स से कुछ गलती हो गई थी जिसकी वजह से जवान के परिजनों ने उस लड़की को खूब पीटा और उस समय वो नर्स गर्भवती थी तथा बुरी तरह जख्मी हो जाने के कारण वो नर्स वहीं तड़प-तड़प कर मर गई और वह उसी गर्भवती अवस्था में अस्पताल के चक्कर काटती है और रात के समय हर आने-जाने वाले को दिखाई देती है.

कहते हैं इस अस्पताल के चारों ओर रूहों का जाल बिछा है, यह जाल इतना मजबूत है कि इसे पार कर पाना वाकई मुश्किल है. चौकीदार से लेकर स्टाफ तक वहां हर आत्माएं अपना वही पुराना रोल निभा रही हैं जो वह जिंदा होने पर निभाते थे.

जैसलमेर शहर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक ऐसा गांव जिसमें अब कोई रहना नहीं चाहता. लोग कहते हैं उस गांव में भूतों और आत...
30/12/2024

जैसलमेर शहर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक ऐसा गांव जिसमें अब कोई रहना नहीं चाहता. लोग कहते हैं उस गांव में भूतों और आत्माओं का डेरा है. कहा तो यह भी जाता है कि उस गांव में फैली दहशत के पीछे जो कहानी है वह उससे भी ज्यादा भयानक और खतरनाक है. जिसकी बुरी नजर की वजह से जो भी उस गांव में आता है वह अकाल मौत का शिकार बन जाता है.

यूं तो हम सभी ने कभी ना कभी भूत-प्रेत पिशाचों से जुड़ी कहानियों को पढ़ा या सुना होगा. हो सकता है कुछ ने ऐसी पारलौकिक शक्तियों का सामना भी किया हो लेकिन जो कहानी हम यहां आपको सुनाने जा रहे हैं वह थोड़ी अविश्वस्नीय जरूर है लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वह एक बेहद खौफनाक सच है जिसका सामना उन्हें अकसर या कहें शायद रोज ही करना पड़ता है.
मरने के बाद भी जिन्दा है वो

कुलधरा, जैसलमेर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक गांव अपनी दहशत के लिए आसपास कुख्यात बन गया है. आपको यह बात तो पता ही होगी कि जिन स्थानों को पारलौकिक ताकते अपने कब्जे में ले लेती हैं उन स्थानों पर बसने वाले लोग या तो स्वयं उस स्थान को छोड़ कर चले जाते हैं और अगर नहीं जाते तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है. कुलधरा भी ऐसा ही एक गांव है जहां पहले ब्राह्मण समुदाय का वास था. ऐसा माना जाता है कि सन 1825 में इस गांव में रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण और आसपास के 84 गांवों के लोग रातोंरात अपना घर छोड़कर चले गए थे. सन 1300 से इस गांव में पालीवाल ब्राह्मण की पीढ़ियां रहा करती थी और रक्षाबंधन के एक दिन सभी इस गांव को छोड़कर चले गए. ऐसा माना जाता है इस दिन कुछ ऐसा दर्दनाक घटा था जिसके बाद आज तक भी बहुत से पालीवाल ब्राह्मण रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाते.

मौत से छीनकर अपनी जिंदगी दुबारा वापस लाई बड़े पैमाने

पर हुए इस पलायन के पीछे की कहानी कुछ यह कहती है.

जैसलमेर के दीवान सलीम सिंह को कुलधरा समेत 84 गांवों के मुखिया की खूबसूरत बेटी से प्यार हो गया था. सलीम सिंह ने गांव के लोगों को यह धमकी दी थी कि अगर उसका विवाह उस लड़की के साथ ना हुआ तो वह करों में और ज्यादा वृद्धि कर देगा. ऐसे हालातों में गांव के मुखिया ने उस स्थान को छोड़कर जाने का निश्चय कर लिया और अपने पीछे यह श्राप छोड़ गए कि जो भी उनके जाने के बाद इस गांव में रहेगा या बसने की कोशिश करेगा वह अपनी जान से हाथ धो देगा. मुखिया और उसकी के जाने के बाद गांव के बहुत से लोग धीरे-धीरे कर के बीमार पड़ने लगे या फिर अकारण ही मृत्यु के ग्रास बनते गए. इस घटना के बाद कुलधरा और आसपास के 84 गांव के लोगों ने अपना-अपना घर छोड़ दिया और तब से लेकर अब तक कोई भी उस गांव में बसने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है.

29/12/2024

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