Ravi Beniwal

Ravi Beniwal खेती बागवानी सब्जी के बारे में कोई भी जानकारी लेनी हो तो मैसेज करे

13/12/2025
गेहूँ की वृद्धि अवस्थाएँ: बेहतर प्रबंधन के लिए फसल विकास को समझनागेहूँ की वृद्धि अवस्थाओं को जानने से किसानों को सही समय...
12/12/2025

गेहूँ की वृद्धि अवस्थाएँ: बेहतर प्रबंधन के लिए फसल विकास को समझना

गेहूँ की वृद्धि अवस्थाओं को जानने से किसानों को सही समय पर पानी, पोषक तत्व और कीट या रोग नियंत्रण का प्रयोग करने में मदद मिलती है, जिससे उपज में 15-25 प्रतिशत की वृद्धि होती है।

गेहूँ की मुख्य वृद्धि अवस्थाएँ

1. अंकुरण और अंकुरण अवस्था (0-25 दिन)

* बीज पानी सोखते हैं, फूलते हैं और अंकुरित होते हैं।
* जड़ें और अंकुर विकसित होते हैं।
* प्रबंधन: मिट्टी में नमी सुनिश्चित करें, उपचारित बीजों का उपयोग करें और शुरुआती खरपतवारों को नियंत्रित करें।

2. टिलरिंग अवस्था (25-45 दिन)

* पौधा अतिरिक्त अंकुर उत्पन्न करता है जिन्हें टिलर्स कहा जाता है।
* प्रत्येक टिलर्स में एक दाना विकसित हो सकता है।
* प्रबंधन: नाइट्रोजन उर्वरक का पहला छिड़काव करें, एफिड्स और आर्मीवर्म की निगरानी करें।

3. तने का विस्तार / जोड़ अवस्था (45-65 दिन)

* तने लंबे हो जाते हैं और पत्तियाँ फैल जाती हैं।
* प्रबंधन: नाइट्रोजन का दूसरा छिड़काव, ज़रूरत पड़ने पर सिंचाई करें, रस्ट और पत्ती रोगों की निगरानी करें।

4. अंकुरण अवस्था (65-75 दिन)

* विकसित होने वाला शीर्ष पत्ती के आवरण में बंद होता है।
* प्रबंधन: कीटों और रोगों से सुरक्षा, मिट्टी की नमी बनाए रखें।

5. अंकुरण / पुष्पन अवस्था (75-85 दिन)

* पुष्पन होता है और परागण होता है।
* प्रबंधन: गिरने से बचाने के लिए अत्यधिक नाइट्रोजन से बचें, सावधानीपूर्वक सिंचाई करें, यदि आवश्यक हो तो कवकनाशी का प्रयोग करें।

6. दाना भरने / परिपक्वता अवस्था (85-120 दिन)

* दाना स्टार्च और प्रोटीन से भर जाता है।
* पोषक तत्वों के दानों में जाने पर पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं।
* प्रबंधन: परिपक्वता के समय सिंचाई कम करें, देर से होने वाले रोगों की निगरानी करें, कटाई की तैयारी करें।

अवस्थाओं को समझने का महत्व

* उर्वरक, सिंचाई और कीट नियंत्रण का सही समय पर उपयोग करने में मदद करता है।
* टिलर की उत्तरजीविता और दाने के वजन में सुधार करता है।
* रोगों, कीटों और सूखे से होने वाले नुकसान को कम करता है।
* कुल गेहूँ की उपज और गुणवत्ता को अधिकतम करता है।

विकास चरणों की निगरानी से यह सुनिश्चित होता है कि गेहूं की फसल को सही समय पर सही देखभाल मिले, जिससे पौधे अधिक स्वस्थ होंगे और अनाज का उत्पादन अधिक होगा।

*📍सरसों की बुवाई से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:🌱 ये बहुत काम की बात है आप मानोगे और शेयर करोगे तो लोगो को बहुत लाभ मिलेगा* 1...
13/10/2025

*📍सरसों की बुवाई से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:🌱 ये बहुत काम की बात है आप मानोगे और शेयर करोगे तो लोगो को बहुत लाभ मिलेगा*

1. *बीज का बीजोपचार*: सरसों की फसल को प्रारंभिक अवस्था से लेकर अंत तक कई रोगों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजोपचार बहुत ही जरूरी है।

*बीजोपचार के लिए सिफारिशें:*

- *फफूंदनाशी दवा*: कार्बेंडाजिम 50% WP या Metalaxyl 8% + Mancozeb 64% का उपयोग करें, जो 3-4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से प्रभावी है। यह तना गलन (सफेद रोली रोग) से बचाती है।
- *कीटनाशक*: इमिडाक्लोरपीड 17.5 SL का उपयोग करें, जो 5 मिली/किलोग्राम बीज की दर से प्रभावी है।

2. *उर्वरकों का चयन*: DAP की जगह SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का उपयोग करना बेहतर हो सकता है, क्योंकि इसमें फॉस्फोरस के साथ-साथ सल्फर भी होता है, जो पौधों के लिए फायदेमंद है।

*इन सिफारिशों का पालन करके, आप अपनी सरसों की फसल को स्वस्थ और उत्पादक बना सकते हैं।*

सरसों की फसल में सल्फर (गंधक) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि यह तेल की मात्रा और दानों की गुणवत्ता को बढ़ाता है। ...
13/10/2025

सरसों की फसल में सल्फर (गंधक) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि यह तेल की मात्रा और दानों की गुणवत्ता को बढ़ाता है। सल्फर डालने का सही समय और तरीका निम्नलिखित है:

*📍सल्फर डालने का सही समय:*

1. *बुवाई के समय (बेसल डोज़):* सल्फर को बुवाई के समय ही मिट्टी में मिला देना सबसे अच्छा होता है। यह पौधे को शुरुआत से ही सल्फर की आवश्यकता को पूरा करता है।
2. *टॉप ड्रेसिंग (जरूरत हो तो):* यदि मिट्टी में सल्फर की कमी हो, तो 30-35 दिन बाद जब पौधे में 5-6 पत्तियाँ आ जाएं या फूल आने से पहले टॉप ड्रेसिंग की जा सकती है।

*📍सल्फर की मात्रा प्रति एकड़:*

- 10-12 किलो सल्फर (S) की आवश्यकता होती है।
- यदि सल्फर युक्त खाद का उपयोग कर रहे हैं, तो मात्रा इस प्रकार रखें:
- बेंटोनाइट सल्फर (90%): 12-15 किलो प्रति एकड़
- जिप्सम (18% S): 60-70 किलो प्रति एकड़

*📍सल्फर देने का तरीका:*

- *बुवाई के समय:* अन्य खादों (DAP, यूरिया, पोटाश) के साथ मिलाकर मिट्टी में मिला दें।
- *टॉप ड्रेसिंग के समय:* बारीक पाउडर वाली सल्फर मिट्टी में हल्की सिंचाई के साथ डालें ताकि पौधे को जल्दी अवशोषण हो।

*📍महत्वपूर्ण बातें:*

- सल्फर को बीज के सीधे संपर्क में न आने दें।
- सिंचाई के बाद या नमी वाली मिट्टी में सल्फर डालना बेहतर होता है।
- सल्फर की कमी से पत्तियाँ पीली और छोटी रह जाती हैं, फूल और फली कम लगती है।

*नोट:- ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए Chennel पर क्लिक कर *Follow* करें

🌾 (TSP vs SSP)"TSP या SSP — कौन सी खाद आपकी फसल के लिए सही?" 🌱क्या आप जानते हैं❓👉 SSP (Single Super Phosphate) में लगभग ...
13/10/2025

🌾 (TSP vs SSP)

"TSP या SSP — कौन सी खाद आपकी फसल के लिए सही?" 🌱

क्या आप जानते हैं❓
👉 SSP (Single Super Phosphate) में लगभग 16% फॉस्फोरस और 12% सल्फर होता है।
👉 जबकि TSP (Triple Super Phosphate) में 46% फॉस्फोरस होता है लेकिन सल्फर नहीं।

✅ सल्फर पसंद फसलें (सरसों, प्याज, लहसुन, चना) ➜ SSP बेहतर है
✅ फॉस्फोरस चाहने वाली फसलें (गेहूँ, मक्का, धान) ➜ TSP उपयुक्त है

💡 सही खाद का चुनाव = ज़्यादा उत्पादन और कम खर्चा!
🌾

*बुवाई से पूर्व भूमि में ट्राइकोडर्मा मिलाना:*चने की फसल में उकठा रोग की समस्या को कम करने के लिए बुवाई से पूर्व भूमि मे...
13/10/2025

*बुवाई से पूर्व भूमि में ट्राइकोडर्मा मिलाना:*

चने की फसल में उकठा रोग की समस्या को कम करने के लिए बुवाई से पूर्व भूमि में ट्राइकोडर्मा मिलाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। ट्राइकोडर्मा एक प्रकार का कवक है जो मिट्टी में पाए जाने वाले हानिकारक कवकों को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार करता है और पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है।

*ट्राइकोडर्मा का उपयोग करने का तरीका:*

1. *बुवाई से पूर्व:* ट्राइकोडर्मा को मिट्टी में मिलाने से पहले इसकी मात्रा का ध्यान रखें और इसे अच्छी तरह से मिट्टी में मिला दें।
2. *मात्रा:* ट्राइकोडर्मा की मात्रा मिट्टी की प्रकृति और फसल की आवश्यकता के अनुसार तय की जानी चाहिए।
3. *मिश्रण:* ट्राइकोडर्मा को गोबर की खाद या अन्य जैविक पदार्थों के साथ मिलाकर मिट्टी में मिलाने से इसकी प्रभावशीलता बढ़ सकती है।

चने की फसल में उकठा रोग की समस्या को कम करने के लिए ट्राइकोडर्मा का उपयोग एक प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल तरीका हो सकता है। इसके अलावा, चने की उच्च उत्पादक किस्मों का चयन करके और उचित कृषि पद्धतियों का पालन करके भी फसल की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।

किस्में हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जा सकती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख किस्में निम्नलिखित हैं:--

*📍चने की प्रमुख किस्में:*

1. *पूसा मानव*: यह एक लोकप्रिय किस्म है जो उच्च उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है।
2. *RVG 202*: यह किस्म भी उच्च उत्पादन क्षमता और विभिन्न रोगों के प्रति सहनशीलता के लिए प्रसिद्ध है।
3. *फुले बिक्रम*: यह किस्म महाराष्ट्र में बहुतायत में उगाई जाती है और इसकी उत्पादन क्षमता बहुत अधिक होती है।
4. *JG 130*: यह एक और महत्वपूर्ण किस्म है जो विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जाती है और इसकी उत्पादन क्षमता भी बहुत अच्छी होती है।
5. *GNG 2171, GNG 2461, GNG 1958, GNG 2144, और GNG 2207*: ये सभी किस्में उच्च उत्पादन क्षमता और विभिन्न रोगों के प्रति सहनशीलता के लिए जानी जाती हैं।

🌾DBW-327 (करण शिवानी) गेहूं की टॉप किस्म – किसानों की पहली पसंददोस्तों, अगर आप सिंचाई वाले इलाकों में गेहूं की खेती करते...
13/10/2025

🌾DBW-327 (करण शिवानी) गेहूं की टॉप किस्म – किसानों की पहली पसंद

दोस्तों, अगर आप सिंचाई वाले इलाकों में गेहूं की खेती करते हैं —
तो DBW-327 (करण शिवानी) आपके लिए एक बेहतरीन और ज्यादा उपज देने वाली किस्म है 👇
🌱मुख्य विशेषताएँ:-

✅ औसत पैदावार – 31 क्विंटल प्रति एकड़
✅ अधिकतम पैदावार – 35 क्विंटल तक
✅ पकने की अवधि – लगभग 155 दिन
✅ पौधे की ऊँचाई – 95 से 100 सेमी
✅ बीज की मात्रा – 40 किलो प्रति एकड़
✅ सिंचाई – 5 से 6 बार जरूरी (पहली सिंचाई 20–25 दिन बाद)
✅ चपाती गुणवत्ता – बहुत बढ़िया
✅ जिंक और आयरन की मात्रा अधिक
✅ गर्मी और सूखा सहनशील किस्म

⚠️ध्यान दें:-

❌ यह किस्म सिंचित खेतों के लिए ही उपयुक्त है
❌ खेत में अच्छी नमी, सही खाद और रोग नियंत्रण जरूरी है

👉 बुवाई का सही समय:-
🗓️ *20 अक्टूबर से 5 नवंबर तक*

💬 किसान भाइयों, अगर आप गेहूं में ज्यादा उत्पादन और बढ़िया गुणवत्ता चाहते हैं,
तो इस सीजन DBW-327 (करण शिवानी) ज़रूर लगाएँ 🌾

#गेहूं #करणशिवानी #गेहूंकीनईकिस्म #उच्चउपज #खेतीकीजानकारी #किसानदोस्त #गेहूंखेती

25/06/2025

राजस्थान को बेहाल कर सकता है 26 जून का दिन, 11 जिलों में अति भारी-12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग जयपुर

25/06/2025

उतर राजस्थान में 26 से 28 जून के दौरान अच्छी बारिश - ⛈️ मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर

14/05/2025

उत्तर भारत में #नरमा की सबसे अच्छी वैरायटियों की सूची:

1. रासी 773- ये रासी की सबसे बेहतरीन वैरायटी में से एक है,उत्तर भारत में इसका चलन काफी अच्छा था,पर अब दो तीन साल से इसमें रेजिस्टेंस कम हो गया है,किसान भाई इसका उपयोग अब न करें।
मिट्टी: मध्यम से भारी (दोमट, चिकनी)
पानी: अधिक (6-8 सिंचाई) इसको पानी ज्यादा चाहिए।
मुख्य विशेषताएं: उच्च उपज, अगेती और पछेती दोनों के लिए उपयुक्त।लड़ीदार टिंडे, छोटे लेकिन संख्या में अधिक (25-30 टिंडे/पौधा)।
रस चूसक कीटों (सफेद मक्खी, जासिड) और सीएलसीवी सहनशील पर अब उतना असरदार नहीं है।गिनिंग आउटटर्न (GOT) ~40%。
अवधि: 150-165 दिन (छोटी)
उपज क्षमता: 10-12 क्विंटल/एकड़ (अच्छी प्रथाओं के साथ)।
उपयुक्तता: अगेती (मार्च-अप्रैल) बेहतर, पछेती (मई-जून) में सावधानी।
2. रासी 776– ये भी रासी की प्रचलित वैरायटी है,जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन की क्षमता रखती है।
मिट्टी: हल्की, रेतीली
पानी: कम (4-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:
–माध्यम से लंबी अवधि 160 से 175 दिन, कम पानी में कारगर।बड़े टिंडे (4-5 ग्राम), पौधा ऊंचाई 100-120 सेमी।सीएलसीवी और रस चूसक कीटों के प्रति मध्यम सहनशील।GOT ~38%। फाल काफी लेट लेती है पचेती में बिजाई न करें ।
उपज क्षमता:9-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती, बरानी क्षेत्र।
3. राशि 650 ये भी काफी अच्छी वैरायटी है,
मिट्टी: मध्यम से हल्की
पानी: कम से मध्यम (5-7 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: नई वैरायटी, लड़ीदार टिंडे, पूरे समय हरी।मध्यम आकार के टिंडे (3.5-4.5 ग्राम)।
GOT ~39%, चुगाई आसान।
अवधि: 150-165 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती और मध्यम अवधि।
4. रासी 926 ये तीन चार साल पुरानी वैरायटी है,काफी एरिया में अच्छा प्रदर्शन भी किया है।
मिट्टी: मध्यम से हल्की (दोमट)पानी: मध्यम से हल्का (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: पिछले सीजन में अच्छा प्रदर्शन, लड़ीदार टिंडे।पौधा ऊंचाई 120-140 सेमी, GOT ~38.5%,सीएलसीवी और सफेद मक्खी सहनशील।अवधि: 150-160 दिन (मध्यम)
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती से मध्यम।
5. यूएस 51 काफी पुरानी वैरायटी है,पर आज भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता है।
मिट्टी: हल्की से मध्यम (रेतीली)
पानी: कम (4-5 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: पुरानी वैरायटी, कम लागत, कम पानी में उपयुक्त। टिंडे का साइज थोड़ा छोटा है,पौधा हाइट भी कम करता है,छोटे टिंडे (3-4 ग्राम), पौधा ऊंचाई 90-110 सेमी।GOT ~37%。
अवधि: 150-165 दिन (छोटी से मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी कम, जासिड मध्यम।
उपज क्षमता: 9-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती, कम संसाधन।
6. यूएस 71 ये भी काफी पुरानी वैरायटी है,इसका चलन अब थोड़ा कम है।
मिट्टी: भारी से मध्यम
पानी: अच्छा (6-8 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:लड़ीदार टिंडे, पौधा ऊंचाई 140-160 सेमी।सीएलसीवी और तेला (जासिड) सहनशील, चुगाई आसान।GOT ~39.5%。
अवधि: 160-180 दिन (लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, जासिड उच्च, सफेद मक्खी मध्यम।
उपज क्षमता: 10-12 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती ।
7. यूएस 81
मिट्टी: भारी से मध्यम
पानी: मध्यम (5-7 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: टिंडे काफी अच्छी मात्रा में एक साथ आते है, नीचे से ऊपर तक लड़ीदार टिंडे (20-25 टिंडे/पौधा)।रस चूसक कीटों और सीएलसीवी सहनशील।
GOT ~38%。
अवधि: 160-175 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, सफेद मक्खी मध्यम।
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती
8. यूएस 91 रेतीली मिट्टी में काफी कामयाब वैरायटी है।
मिट्टी: मध्यम, हल्की मिट्टी में कामयाब में भी
पानी: कम (4-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: नई वैरायटी, बड़े टिंडे (4.5-5 ग्राम), सीएलसीवी सहनशील।पौधा ऊंचाई 110-130 सेमी, GOT ~39%。छोटी अवधि, बरानी क्षेत्रों में लोकप्रिय।अवधि: 140-160 दिन (छोटी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, जासिड और सफेद मक्खी मध्यम।उपज क्षमता: 8-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती ओर लेट में भी कामयाब
9. बायर 7172
मिट्टी: भारी से मध्यम
पानी: मध्यम (5-7 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:ऊपर से नीचे टिंडे, सीएलसीवी कम।गेहूं-कपास चक्र में उपयुक्त, GOT ~38.5%。
पौधा ऊंचाई 130-150 सेमी।
अवधि: 150-170 दिन (मध्यम से लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती, पछेती से बचें
10. बायर 7272
मिट्टी: भारी से मध्यम
पानी: अच्छा (6-8 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: बड़े और सीधे टिंडे (4.5-5.5 ग्राम), रस चूसक कीटों सहनशील।उच्च GOT ~40.5%, पंजाब और हरियाणा में लोकप्रिय।
पौधा ऊंचाई 140-160 सेमी।
अवधि: 160-180 दिन (लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, सफेद मक्खी और जासिड उच्च।
उपज क्षमता: 10-12 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती और मध्यम।
11. अंकुर अजय (555)
मिट्टी: भारी से मध्यम
पानी: अच्छा (6-7 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: मोटे टिंडे (4-5 ग्राम), ब्लाइट रोग कम।पिछले साल अच्छी पैदावार, GOT ~38%。
पौधा ऊंचाई 120-140 सेमी।
अवधि: 150-165 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: ब्लाइट उच्च, सीएलसीवी मध्यम, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती।
12. अंकुर समरजीत
मिट्टी: भारी से मध्यम
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: पास-पास(HDPS )लगाने योग्य, वजनदार टिंडे (4-4.5 ग्राम)।
रस चूसक कीटों सहनशील, GOT ~39%。
पौधा ऊंचाई 110-130 सेमी।
अवधि: 150-160 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: रस चूसक कीट उच्च, सीएलसीवी मध्यम
उपज क्षमता: 9-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती या माध्यम।
13. नुजिवीदु टैलेंट काफी एरिया में अच्छा प्रदर्शन
मिट्टी: मध्यम से हल्की
पानी: हल्का से मध्यम (4-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:
नई अगेती वैरायटी, कम समय में तैयार।उखड़ा और रस चूसक कीटों सहनशील, GOT ~39.5%。
मध्यम टिंडे (3.5-4.5 ग्राम), पौधा ऊंचाई 100-120 सेमी।
अवधि: 140-150 दिन (छोटी)
बीमारी सहनशीलता: उखड़ा उच्च, सीएलसीवी उच्च, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 8.5-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती
14. नुजिवीदु सिम सिम
मिट्टी: भारी से मध्यम
पानी: अच्छा (6-8 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: अच्छी ऊंचाई (140-160 सेमी), अंत तक हरी।पंजाब में सफल, लाल पत्ती और सीएलसीवी सहनशील।
GOT ~40%, बड़े टिंडे (4.5-5 ग्राम)।
अवधि: 160-180 दिन (लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, लाल पत्ती उच्च, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 10-12 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती।
15. अजीत सीड 155
मिट्टी: हल्की, रेतीली
पानी: कम (4-5 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: लड़ीदार टिंडे, कम झड़ने वाली, बरानी क्षेत्रों में उपयुक्त।मध्यम टिंडे (3.5-4 ग्राम), GOT ~38%,पौधा ऊंचाई 100-120 सेमी।
अवधि: 140-155 दिन (छोटी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, उखड़ा मध्यम।
उपज क्षमता: 8-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती।
16. महिको परिंदा
मिट्टी: मध्यम
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: मध्यम अवधि, लड़ीदार टिंडे (20-25 टिंडे/पौधा)।बीमारियों सहनशील, GOT ~38.5%。
पौधा ऊंचाई 120-140 सेमी।
अवधि: 140-160 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-11.5 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती और मध्यम।
17. महिको बलराज +
मिट्टी: मध्यम से हल्की
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: लड़ीदार टिंडे, उखड़ा रोग कम, उच्च उपज।GOT ~39%, पौधा ऊंचाई 110-130 सेमी।मध्यम टिंडे (4-4.5 ग्राम)।
अवधि: 140-160 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: उखड़ा उच्च, सीएलसीवी उच्च, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती।
18. विख्यात कृषिधन
मिट्टी: मध्यम
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:अगेती, लड़ीदार टिंडे, उखड़ा कम।मध्यम टिंडे (3.5-4.5 ग्राम), GOT ~38%。
पौधा ऊंचाई 110-130 सेमी।
अवधि: 150-160 दिन (छोटी)
बीमारी सहनशीलता: उखड़ा उच्च, सीएलसीवी मध्यम।
उपज क्षमता: 8-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती।
19. तिएरा -738
मिट्टी: मध्यम से हल्की
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:मध्यम अवधि, बीमारियों सहनशील।मध्यम टिंडे (4-4.5 ग्राम),टिंडे बिल्कुल पास पास लगते है, GOT ~38.5%。
पौधा ऊंचाई 120-140 सेमी।
अवधि: 140-160 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-10 क्विंटल/एकड़ HDPS में कामयाब है। उपयुक्तता: अगेती और मध्यम लेट भी लगा सकते है।
20. कावेरी– टक्कर नया बीज है पिछले साल ट्रायल में काफी अच्छा प्रदर्शन रहा था ।
मिट्टी: मध्यम से भारी
पानी: मध्यम से अच्छा (5-7 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: हाइब्रिड, राजस्थान और हरियाणा में लोकप्रिय।मध्यम से बड़े टिंडे (4-5 ग्राम), GOT ~40%,रस चूसक कीटों सहनशील, चुगाई आसान।पौधा ऊंचाई 130-150 सेमी।
अवधि: 150-170 दिन (मध्यम से लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, सफेद मक्खी और जासिड उच्च।
उपज क्षमता: 10-12 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती, पछेती में सावधानी।
21. कावेरी 307
मिट्टी: मध्यम से भारी
पानी: अच्छा (6-8 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: लबे पौधे (140-160 सेमी), बड़े और वजनदार टिंडे (4.5-5.5 ग्राम)।उच्च GOT ~40-42%, सीएलसीवी सहनशील।गेहूं-कपास चक्र के लिए उपयुक्त।अवधि: 155-170 दिन (मध्यम से लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, रस चूसक कीट उच्च।
उपज क्षमता: 10-13 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती, पछेती में जोखिम।
22. रासी 846 राशि का नया प्रचलित बीज है,पिछले सीजन काफी अच्छा प्रदर्शन रहा था।
मिट्टी: मध्यम से हल्की
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: अर्ध-फैली हुई वैरायटी, पौधा ऊंचाई 130-140 सेमी।मध्यम टिंडे (4-4.5 ग्राम), GOT ~39.3%。उच्च उपज, रस चूसक कीटों के प्रति मध्यम सहनशील।
अवधि: 160-170 दिन (लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, जासिड और सफेद मक्खी मध्यम।
उपज क्षमता: 10-12 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती और पछेती, पछेती में सीएलसीवी जोखिम।
23. रासी 960
मिट्टी: मध्यम से भारी
पानी: अच्छा (6-8 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: नई हाइब्रिड, बड़े टिंडे (4.5-5.5 ग्राम), GOT ~40.5%。नीचे से ऊपर तक लड़ीदार टिंडे, चुगाई आसान।पंजाब और हरियाणा में लोकप्रिय।
अवधि: 160-180 दिन (लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, सफेद मक्खी उच्च, जासिड मध्यम।
उपज क्षमता: 10-12 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती, पछेती में सावधानी।
24. टाटा दिग्गज– दो तीन सालों से बहुत ही शानदार प्रदर्शन,हरियाणा ओर राजस्थान में
मिट्टी: मध्यम से हल्की
पानी: मध्यम से कम (4-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:छोटी से मध्यम अवधि, राजस्थान के बरानी क्षेत्रों में लोकप्रिय। मध्यम टिंडे (3.5-4.5 ग्राम), GOT ~38%,सीएलसीवी और उखड़ा सहनशील।अवधि: 130-150 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, उखड़ा उच्च, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-10 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती या माध्यम, बरानी क्षेत्र।

25. टाटा परवीर
मिट्टी: मध्यम
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं:मध्यम ऊंचाई (120-140 सेमी), लड़ीदार टिंडे (20-25 टिंडे/पौधा)।GOT ~38.5%, चुगाई आसान।पंजाब और हरियाणा में अच्छा प्रदर्शन।अवधि: 155-170 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, रस चूसक कीट मध्यम।
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती और मध्यम।

26. रासी 659
मिट्टी: मध्यम से भारी
पानी: अच्छा (6-8 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: हाइब्रिड, उच्च उपज, बड़े टिंडे (4.5-5.5 ग्राम)।GOT ~40%, पौधा ऊंचाई 140-160 सेमी।सीएलसीवी और रस चूसक कीटों सहनशील।अवधि: 160-180 दिन (लंबी)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी उच्च, सफेद मक्खी उच्च, उखड़ा मध्यम।
उपज क्षमता: 10-11 क्विंटल/एकड़।
उपयुक्तता: अगेती, पछेती में सावधानी।

27. अजीत 945 (ACH 945)
मिट्टी: मध्यम
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएं: लड़ीदार टिंडे (20-25/पौधा), GOT ~38%, पौधा ऊंचाई 120-140 सेमी
अवधि: 140-160 दिन (मध्यम)
बीमारी सहनशीलता: सीएलसीवी मध्यम, रस चूसक कीट मध्यम
उपज क्षमता: 9-11 क्विंटल/एकड़
उपयुक्तता: अगेती, मध्यम
28.रासी 951 (RCH 951):
मिट्टी: मध्यम-हल्की मिट्टी,
पानी: माध्यम 5-6 सिंचाई
मुख्य विशेषता: बड़े टिंडे (4-4.5 ग्राम), GOT ~39%, पौधा ऊंचाई 110-130 सेमी, 140-160 दिन, सीएलसीवी उच्च सहनशील, रस चूसक कीट मध्यम, 9-11 क्विंटल/एकड़, अगेती/मध्यम बुवाई।
राजस्थान के लिए बरानी एरिया के लिए आदर्श

29.डॉ. सीड्स सोलर S–004
मिट्टी: मध्यम-भारी मिट्टी,
पानी: 5-6 सिंचाई,
मुख्य विशेषता: बड़े टिंडे (4-5 ग्राम), GOT ~38%, पौधा ऊंचाई 120-140 सेमी, रेशा 27-29 मिमी, 140-160 दिन, सीएलसीवी मध्यम सहनशील, रस चूसक कीट मध्यम, उखड़ा मध्यम, 9-11 क्विंटल/एकड़, अगेती/मध्यम बुवाई, हरियाणा,राजस्थान/गुजरात, अच्छी टिंडा धारण, आसान चुगाई।
30. प्रभात सीड्स –रैंबो (PCH 225 BG-II):
मिट्टी: मध्यम-हल्की मिट्टी,
पानी: 5-6 सिंचाई,
मुख्य विशेषता: बड़े टिंडे (4-5 ग्राम), GOT ~38%, पौधा ऊंचाई 120-140 सेमी, रेशा 28-30 मिमी, 150-160 दिन, सीएलसीवी मध्यम सहनशील, रस चूसक कीट मध्यम, उखड़ा मध्यम, 10-12 क्विंटल/एकड़, अगेती/मध्यम बुवाई, सभी मिट्टी के लिए उपयुक्त, आसान चुगाई, अच्छी टिंडा धारण, हरियाणा ,राजस्थान/मध्य भारत के कुछ इलाके।
31. महिको Passion+
मिट्टी: माध्यम
पानी: 5–6 सिंचाई,
मुख्य विशेषता: बोल आकार मध्यम से बड़ा,कम बॉल गिरने की समस्या,36-38%,सकिंग पेस्ट (जैसे सफेद मक्खी) के प्रति अच्छी सहनशीलता,पत्ता मरोड़ वायरस के प्रति मध्यम प्रतिरोध,

32. Ajeet 177 BG II
मिट्टी: मध्यम से हल्की (दोमट, रेतीली)
पानी: मध्यम (5-6 सिंचाई)
मुख्य विशेषताएँ: लंबा पौधा (145-155 सेमी), बड़े टिंडा (6.0-6.5 ग्राम), अच्छी टिंडा धारण और प्रतिधारण क्षमता। GOT ~36.5-37.5%। पत्ती लाल होने (leaf reddening) और रस चूसक कीटों (सफेद मक्खी, जासिड) के प्रति उच्च सहनशीलता। अच्छी पुनर्जनन क्षमता (rejuvenation capacity)।
अवधि: 150-160 दिन (मध्यम)
सीएलसीवी (कपास पत्ता मरोड़ वायरस): मध्यम से उच्च। रस चूसक कीट (सफेद मक्खी, जासिड): उच्च सहनशील।
पत्ती लाल होना (leaf reddening): उच्च सहनशील।
अगेती और मध्यम बुवाई
क्षेत्र: हरियाणा, पंजाब, राजस्थान। सिंचित और बरानी दोनों तरह की खेती के लिए उपयुक्त।

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