03/10/2026
ग़ज़ल
पेश ए ख़िदमत 🌹🌹
तुम्हारा जब से सजदा कर लिया है,
ये अपना वक़्त अच्छा कर लिया है।
तुम्हारे नाम की मालाएँ जपकर,
अजब दिल ने तमाशा कर लिया है।
गुलाबों का उसे तोहफ़ा देकर,
मोहब्बत ने भी सौदा कर लिया है।
किसी ने रात में चुपके से आकर,
मेरे ख़्वाबों में पहरा कर लिया है।
उसे हर वक़्त दिल ने याद करके,
कई ज़ख़्मों को ताज़ा कर लिया है।
डॉ. मंतशा ‘क़ातिब’